भोपाल: मध्यप्रदेश में निजी नर्सिंग कॉलेजों में सामने आई अनियमितताओं के बाद अब शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। रविवार को भोपाल में आयोजित एक पत्रकारवार्ता में राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) ने राज्य के विभिन्न शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में स्टाफ की कमी, मान्यता प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और दस्तावेजों से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाया।
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी, NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार, अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और अधिवक्ता अंशुल तिवारी मौजूद रहे। संगठन ने आरोप लगाया कि कई शासकीय नर्सिंग कॉलेज निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
6 कॉलेजों में प्राचार्य और 10 में उप प्राचार्य नहीं
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने दावा किया कि राज्य के कई शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में आवश्यक शैक्षणिक पद रिक्त हैं। उनके अनुसार, छह कॉलेज ऐसे हैं जहां नियमित प्राचार्य नियुक्त नहीं हैं, जबकि दस कॉलेजों में उप प्राचार्य का पद खाली है। इसके अलावा कई संस्थानों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्यूटर की संख्या भी निर्धारित मानकों से कम है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी संस्थानों में ही आवश्यक शैक्षणिक व्यवस्था नहीं होगी तो गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा की अपेक्षा करना कठिन हो जाएगा।
मान्यता प्रक्रिया और दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
रवि परमार ने आरोप लगाया कि सत्र 2026-27 की मान्यता प्रक्रिया के दौरान कुछ शासकीय नर्सिंग कॉलेजों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में विसंगतियां देखने को मिली हैं। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थानों में अनुभव प्रमाण-पत्रों और पदों के विवरण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। एनएसयूआई का कहना है कि इन मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मान्यता प्रक्रिया के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

