कामना कासोटिया भोपाल:

प्रह्लाद सिंह पटेल : पाँच बार सांसद से अब प्रदेश सरकार के मजबूत स्तंभ

मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रह्लाद सिंह पटेल का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। कभी लोकसभा की राजनीति में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले पटेल अब प्रदेश सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री के रूप में सक्रिय हैं। उनका सफर युवा मोर्चा के पदाधिकारी से लेकर केंद्रीय मंत्री और अब विधायक तक, जनता की सेवा और विकास कार्यों से भरा रहा है।

जीवन और प्रारंभिक सफर

28 जून 1960 को नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में जन्मे प्रह्लाद सिंह पटेल किसान परिवार से आते हैं। पिता का नाम श्री मुलायम सिंह पटेल है। पढ़ाई-लिखाई में वे हमेशा अग्रणी रहे। उन्होंने बी.एस.सी., एल.एल.बी. और दर्शनशास्त्र में एम.ए. की डिग्री हासिल की। पत्नी श्रीमती पुष्पलता सिंह पटेल और एक पुत्र व दो पुत्रियों के साथ वे एक सादगीपूर्ण पारिवारिक जीवन जीते हैं।

कृषि उनका व्यवसाय रहा है और यही वजह है कि ग्रामीण जीवन और किसानों की समस्याओं को वे बहुत नजदीक से समझते हैं। उनकी अभिरुचि हमेशा रही है—लोगों के जीवन को विकारमुक्त और व्यवस्थित बनाना।

राजनीतिक करियर

प्रह्लाद सिंह पटेल ने राजनीति की शुरुआत 1982 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष के रूप में की। आगे चलकर वे मध्यप्रदेश युवा मोर्चा के सचिव और महासचिव भी रहे। 1989 में वे पहली बार 9वीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद 1996, 1999, 2014 और 2019 में भी लोकसभा सदस्य बने।

सांसद रहते हुए उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया। 2003 में वे पहली बार केंद्र सरकार में कोयला विभाग के राज्य मंत्री बने। 2019 से 2021 तक संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभाला तथा इसके बाद जल शक्ति और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में राज्य मंत्री रहे।

विधानसभा चुनाव 2023 : पहली बार विधायक

साल 2023 में उन्होंने लोकसभा की सदस्यता छोड़कर विधानसभा की ओर रुख किया। नरसिंहपुर विधानसभा सीट (क्रमांक 119) से भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। यहाँ उनका मुकाबला कांग्रेस के लखन सिंह पटेल से हुआ।

चुनाव परिणाम में प्रह्लाद सिंह पटेल ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कुल 1,10,226 वोट हासिल किए, जबकि उनके प्रतिद्वंदी को 78,916 वोट मिले। इस तरह वे 31,310 मतों के बड़े अंतर से विजयी हुए। उनका वोट शेयर 56.33% रहा। यह जीत दर्शाती है कि जनता उनके लंबे अनुभव और विकास के वादों पर भरोसा करती है।

विकास कार्य और पहलें

मंत्री बनने के बाद से ही प्रह्लाद सिंह पटेल ने ग्रामीण विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

  • ग्रामीण सड़कें : प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश में नई सड़कों का निर्माण और मरम्मत तेज़ी से हुआ है। सड़कों में प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा जा रहा है।
  • मॉडल ग्राम योजना : उन्होंने घोषणा की है कि 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों को चरणबद्ध तरीके से मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • स्वास्थ्य सुविधाएँ : नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायतों में उप-स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण शुरू हुआ है। करोड़ों रुपये की लागत से सड़क, पुल और सीसी रोड का निर्माण हो रहा है।
  • आवास और स्वच्छता : प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को आवास पत्र वितरित किए गए। स्वच्छता संवाद कार्यक्रम के जरिए गांवों में गंदे पानी के प्रबंधन और खुले में शौच मुक्त बनाने की पहल भी हुई है।
  • पारदर्शिता : पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की नई वेबसाइट बनाने का निर्देश देकर उन्होंने योजनाओं को जनता तक पारदर्शी तरीके से पहुँचाने का काम किया।

जनता की उम्मीदें

हालाँकि विकास की राह आसान नहीं है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार जैसी कई चुनौतियाँ हैं। लोगों की उम्मीद है कि प्रह्लाद सिंह पटेल अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता से इन समस्याओं को हल करने में सफल होंगे।

प्रह्लाद सिंह पटेल का राजनीतिक जीवन उनकी प्रतिबद्धता और मेहनत का प्रमाण है। एक किसान पुत्र से पाँच बार सांसद और अब विधायक व मंत्री तक का सफर उनकी लोकप्रियता और जनता के भरोसे की गवाही देता है। नरसिंहपुर की जनता ने उन्हें बड़े अंतर से विजयी बनाकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वे विकास और भरोसे की राजनीति चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले वर्षों में वे किस तरह नरसिंहपुर और मध्यप्रदेश को नई दिशा देने में सफल होते हैं।

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