कामना कासोटिया भोपाल:
विश्वनाथ सिंह पटेल “मुलम भैया”
मध्यप्रदेश के नरोसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विश्वनाथ सिंह पटेल, जिन्हें आम बोलचाल में मुलम भैया के नाम से जाना जाता है, एक किसान‐पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने गाँव से राजनीति की शुरूआत की, जहां उन्होंने सरपंच आदि स्तर की जनसेवा की। उनकी शिक्षा और व्यवहार में यह प्रतिबिंब मिलता है कि वे भूमि एवं ग्राम-गणिक लोगों की ज़रूरतों से जुड़े हुए हैं।
विश्वनाथ सिंह पटेल का जन्म 1951 में हुआ था। वे विवाहित हैं, उनकी पत्नी श्रीमती राजकुमारी पटेल हैं और उनके दो संताने हैं — एक पुत्र और एक पुत्री। पेशे से वे कृषि कार्य में लगे हैं और समाजसेवा को अपना जीवन लक्ष्य मानते हैं।
विधानसभा चुनावों में उनकी राजनीतिक भागीदारी कई कदमों से भरी रही है। पहले कांग्रेस से भी जुड़ाव रहा, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा।
चुनावी लड़ाइयाँ और 2023 की सफलता
- 2018 में तेंदूखेड़ा से उन्होंने कांग्रेस के संजय शर्मा से हार मानी थी। उस समय उनका हार का मार्जिन लगभग 8,643 वोट था।
- 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से मैदान में उतरे और इस बार विकास की बातों और जनता की उम्मीदों को साथ लेकर चले। परिणामस्वरूप, उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार संजय शर्मा को लगभग 12,347 वोटों से हरा दिया।
- 2023 में उन्हें कुल लगभग 83,916 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी संजय शर्मा को लगभग 71,569 वोट मिले। वोट प्रतिशत के हिसाब से विश्वनाथ सिंह को करीब 51.61% वोट मिले जबकि शर्मा को लगभग 44.02%।
यह बड़े बदलाव की लड़ाई थी — पिछली हार से सीख लेकर, जनता-समस्याओं को सामने रख कर, तथा क्षेत्र की ज़रूरतों को ध्यान में रख कर। उनकी जीत ने यह दिखाया कि लोग अब परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं।
विकास कार्य और जनसेवा की झलक
जब नेता किसी क्षेत्र से चुनाव जीतते हैं, तो विकास कार्यों की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। विश्वनाथ सिंह पटेल “मुलम भैया” के चुनावी घोषणापत्र व उनके बाद के कुछ सार्वजनिक कार्यों से यह दिखता है कि उन्होंने निम्नलिखित क्षेत्रों पर काम करने की कोशिश की है:
- स्वच्छता अभियान – प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर “स्वच्छता ही सेवा” जैसे अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया गया है।
- जनसेवा एवं संपर्क – उन्होंने सेवा पखवाड़ा अभियान चलाया है, जिसमें गाँव-देहात में लोगों तक सीधे पहुँचने, उनकी समस्याएँ सुनने और उनका समाधान कर पाने पर जोर है।
- कृषि से जुड़ी पहलें – चूंकि वे स्वयं कृषि से जुड़े हैं, इसलिए खेती-उत्पादकों की समस्याओं, सिंचाई, भूमि सुधार आदि मुद्दों को उन्होंने उठाया है — हालांकि उपलब्ध स्रोतों में अभी तक बहुत विस्तृत परियोजनाओं की सूची नहीं मिल पाई है।
- स्थानीय बुनियादी ढांचा – सड़कों की मरम्मत, पंचायत और गांवों तक संपर्क साधना, प्रशासनिक सुविधाएँ, विकास योजनाएँ लोगों तक पहुँचाने का काम उन्होंने प्राथमिकता माना है। ऐसे कार्य चुनाव प्रचार और बाद के जनसभा-जहाँ जनता की अपेक्षाएँ ज्यादा होती हैं-के दौरान प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
चुनौतियाँ और आगे की राह
विश्वनाथ सिंह पटेल की जीत ने दिखाया कि जनता अब सिर्फ वादों पर विश्वास नहीं कर रही, बल्कि यह देख रही है कि कौन ज़िलों और गाँवों में सचमुच काम कर सकता है। लेकिन चुनौतियाँ भी बड़ी हैं:
- ग्रामीण इलाकों में पानी, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाएँ, सड़कों की स्थिति अभी भी कई जगहों पर बेहतर होने की गुंजाइश है।
- किसानों की आय, फसलों की उचित कीमतें, मौसम-परिस्थितियों की चुनौतियाँ जैसे मुद्दे हैं जिनके समाधान में समय लगेगा।
- शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जन सहभागिता और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा।
विश्वनाथ सिंह पटेल “मुलम भैया” की कहानी यह है कि कैसे एक किसान-पृष्ठभूमि का व्यक्ति लंबे संघर्ष के बाद जनता के बीच विश्वास बना कर चुनाव जीतता है, जनता की उम्मीदों के साथ खड़ा होता है, और विकास की दिशा में कदम बढ़ाता है। उनकी जीत सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि तेंदूखेड़ा की जनता की आवाज़ का परिणाम है, जो बदलाव की चाह में थी।
