Cm mohan yadavCm mohan yadav

अरुणिमा सिंह, भोपाल : भोपाल, मध्य प्रदेश। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर तीन दिन से आंदोलन कर रहे मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टरों ने बुधवार को अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया। सरकार के साथ हुई बातचीत में डॉक्टरों की प्रमुख मांग पर सहमति बनी है। इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹21,500 करने का फैसला लिया गया है।

इसके बाद प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने काम पर लौटने का ऐलान किया।उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इंटर्न डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JUDA) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MTA) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। सरकार की ओर से बताया गया कि मौजूदा स्टाइपेंड में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

लाठीचार्ज और वाटर कैनन के मामले में जांच

आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी विवाद हुआ था। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है। पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है।प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार डॉक्टरों की मांगों को लेकर संवेदनशील है और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है।

तीन दिन से चल रहा था प्रदर्शन

पिछले तीन दिनों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। भोपाल में कमला पार्क के पास डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया था। आंदोलन का असर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिला।हमीदिया अस्पताल में बुधवार दोपहर तक ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि, मरीजों के इलाज के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला। अस्पताल में नियमित दिनों की तुलना में ऑपरेशन की संख्या भी काफी कम रही। इससे कई मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सरकार के फैसले के बाद काम पर लौटे डॉक्टर

तीन दिन तक चले आंदोलन के बाद सरकार और डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत सफल रही। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सहमति बनने और पुलिस कार्रवाई की जांच का भरोसा मिलने के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।अब डॉक्टरों के काम पर लौटने के बाद सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद है। वहीं, बढ़े हुए स्टाइपेंड को लेकर औपचारिक आदेश और लागू होने की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

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