आदेश चौहान: प्रशांत किशोर इन दिनों अपनी बिहार बदलाव यात्रा पर हैं. जिसकी शुरुआत उन्होंने सारण जिले के सिताब दियारा से की, जो जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि भी है.
प्रशांत किशोर का मकसद सूबे के 18 प्रतिशत मुस्लिम वोटो को अपने पाले में करने की है, जिसको पाने के लिए वह कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे है.
वोटरों के समर्थन के लिए ,प्रशांत किशोर की बिहार बदलाव यात्रा
7 सितंबर को प्रशांत किशोर की बिहार बदलाव यात्रा 68 प्रतिशत वाले मुस्लिम बहुल जिले किशनगंज पहुंची ,जहां प्रशान्त किशोर ने मुस्लिमों को लुभाने के लिए अपनी यात्रा का नाम उर्दू भाषा में बदल दिया, और यात्रा का नाम ‘ बिहार बदलाव इजलास ‘ कर दिया. इजलास उर्दू शब्द है जिसका अर्थ होता है सभा या सम्मेलन.
प्रशांत किशोर द्वारा भाषण में उर्दू शब्दों का प्रयोग
किशनगंज के अंजुमन इस्लामिया में प्रशांत किशोर ने मुस्लिमों से संवाद किया, और मुस्लिमों को लुभाने के लिए प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में उर्दू शब्दों का इस्तेमाल किया, और मुस्लिमों को अल्लाह का वास्ता देकर जनसुराज को समर्थन करने की गुजारिश की.
प्रशांत किशोर का जीत का फार्मूला
प्रशांत किशोर के मुताबिक देश में 80 प्रतिशत हिन्दू है, 40 प्रतिशत हिंदू वोट भाजपा को मिलते है, अगर बिहार के हिंदुओं के 40 प्रतिशत वोट, और मुसलमानों के 20 प्रतिशत वोट प्रशांत किशोर को मिल जाए तो, जनसुराज को जितने से कोई नहीं रोक सकता.
पिछले चुनावो में मुस्लिम वोट रजद और उनकी सहयोगी पार्टि
बिहार में मुस्लिमों के एकमुश्त वोट रजद और उसकी सहयोगी पार्टियों को मिलते आए है. अब सवाल है की क्या इस चुनाव में प्रशांत किशोर मुस्लिमों के वोट अपने पाले में करने में सफल हो पाएंगे या नहीं, क्या प्रशांत किशोर इस बार का जनादेश बदल पाएंगे क्योंकि पहले ही प्रशांत किशोर कह चुके है की वो मुस्लिमों को आबादी के हिसाब से टिकट देंगे, मतलब 40 से ज्यादा टिकट वह मुस्लिमों को दे सकते है.
प्रशांत किशोर ने राजनीतिक रणनीतिकार रहते हुए किसे जिताया, किसे हराया
प्रशांत किशोर ने मुस्लिमों के बीच भाषण में बताया कि, 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के विजय अभियान को उन्हीं ने कन्धा दिया था, वही दूसरी ओर 2014 के बाद भाजपा जिन-जिन राज्यों में हारी उसमें प्रशांत किशोर का ही योगदान था, इसको लेकर उन्होंने आंकड़े दिए .
बिहार- 2015, पंजाब- 2017, तेलंगाना – 2018 आंद्र प्रदेश- 2019, दिल्ली और महाराष्ट्र- 2020, तमिल नाडु और पश्चिम बंगाल – 2021 चुनावों में भाजपा की हर हुई थी.
अब देखना दिलचस्प होगा, क्या आम आदमी पार्टी की तरह ही क्या जनसुराज पार्टी भी अपना पहला चुनाव जीत कर बिहार में सरकार बना पाती है या नहीं.
