Muskan Garg: भोजपुरी सिनेमा को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएँ और आलोचनाएँ होती रहती हैं। लोग इसे एक सीमित, विवादित और कमज़ोर कंटेंट वाली इंडस्ट्री मानते हैं। लेकिन भोजपुरी की जानी-मानी अभिनेत्री संभावना सेठ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस इंडस्ट्री की असलियत पर खुलकर बात की है। उनका बयान न सिर्फ कलाकारों की स्थिति बताता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भोजपुरी सिनेमा को लेकर आम लोगों में कई गलतफहमियां हैं।
“भोजपुरी इंडस्ट्री मेहनत और संघर्ष का दूसरा नाम”:
संभावना सेठ ने साफ शब्दों में कहा कि भोजपुरी फिल्मों को लोग बहुत फीके नजरिये से देखते हैं। उन्होंने बताया कि यहां कलाकारों को कम संसाधनों में कड़ी मेहनत करके काम करना पड़ता है। उन्होंने कहा —“जो लोग सोचते हैं कि भोजपुरी इंडस्ट्री सिर्फ विवादित कंटेंट बनाती है, वह इंडस्ट्री की वास्तविकता नहीं जानते। यहां भी अच्छी फिल्में बनती हैं, बस उन्हें सही पहचान नहीं मिल पाती।”
क्यों गलतफहमियों में घिरा रहता है भोजपुरी सिनेमा?
संभावना सेठ ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ सीन या गानों को अलग करके वायरल कर दिया जाता है, जिससे पूरी इंडस्ट्री की छवि खराब दिखती है। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में कई प्रतिभाशाली डायरेक्टर्स, एक्टर्स और टेक्नीशियन काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जो अन्य क्षेत्रीय सिनेमाओं को और उनके डायरेक्टर्स को मिलता है।

“बदलाव आ रहा है—बस उसे देखने की जरूरत है”:
संभावना का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भोजपुरी फिल्मों की क्वालिटी काफी बेहतर हुई है। कहानी, तकनीक, संगीत और एक्टिंग—हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा—“आज कई बड़े कलाकार और नए चेहरे भोजपुरी सिनेमा में अपना योगदान दे रहे हैं। लेकिन दर्शक सिर्फ नेगेटिव चीजों पर ध्यान देते हैं, पॉजिटिव बदलाव को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।”
भोजपुरी कलाकारों का संघर्ष भी किया उजागर:
संभावना सेठ ने बताया कि भोजपुरी कलाकारों को अन्य मुख्य इंडस्ट्री जितने मौके नहीं मिलते, इसलिए उन्हें दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। कई बार सीमित बजट के बावजूद फिल्मों को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, जो इंडस्ट्री की क्षमता और काबिलियत को साबित करता है।
संभावना सेठ का यह बयान भोजपुरी सिनेमा की वास्तविक तस्वीर दिखाता है—एक ऐसी इंडस्ट्री जो मेहनत, संघर्ष और बदलाव की राह पर है। उनका कहना है कि दर्शकों को चाहिए कि वे भोजपुरी सिनेमा को खुले मन से देखें और उसकी सकारात्मक प्रगति को भी स्वीकार करें।
