Muskan Garg: दुनिया में कुछ जगहें ऐसी हैं जहाँ प्रकृति अपने अनोखे रूप में दिखाई देती है। इनमें से एक है पोलर नाइट की घटना, जहाँ महीनों तक सूरज क्षितिज पर नहीं उगता। इस समय दुनिया का यह हिस्सा पूरी तरह अंधकार में डूबा रहता है। हाल ही में खबर आई है कि एक क्षेत्र में 65 दिनों तक सूरज दिखाई नहीं देगा और 22 जनवरी तक लगातार रात ही रहेगी। यह घटना जितनी आश्चर्यजनक है, उतनी ही वैज्ञानिक रूप से रोचक भी।
कौनसा है यह स्थान?
यह अनूठी घटना मुख्य रूप से नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, रूस, अलास्का और कनाडा के उत्तरी हिस्सों में होती है। विशेष रूप से नॉर्वे के शहर ट्रोम्सो और अलास्का के उट्कियागविक में हर साल यह 65 से 67 दिनों तक चलती है। यहाँ नवंबर के अंत से लेकर जनवरी के अंतिम सप्ताह तक सूर्य बिल्कुल नहीं उगता।
क्यों नहीं उगता सूरज? क्या है वैज्ञानिक कारण:
पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इस झुकाव के कारण साल में कुछ समय ऐसे प्रदेश सूर्य की ओर मुड़ जाते हैं, जहाँ लंबे दिन रहते हैं, और कुछ समय ऐसे होते हैं जब वही क्षेत्र सूर्य से पूरी तरह विपरीत दिशा में हो जाते हैं और इसका परिणाम कुछ इस प्रकार होता है: सूर्य क्षितिज के नीचे ही रहता है। दिन का उजाला भी हल्का और धुंधला होने लगता है। कई जगह पूर्ण अंधकार होने लगता है, जिसे पोलर नाइट कहा जाता है।
जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
वहाँ के लोगों पर 65 दिनों की लगातार रात का असर गहरा होता है: शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को बदल जाती है। सूरज की कमी के कारण लोगों में विटामिन-डी की कमी होने लगती है। मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी देखे जाते हैं। ठंड अत्यधिक बढ़ जाती है और तापमान -30°C तक पहुँच जाता है।
इसके बावजूद वहाँ के लोग इस अंधेरी ऋतु को खास तरीके से मनाते हैं। वे रंगीन रोशनी, त्योहार और गतिविधियों से अपने शहरों को जगमग रखते हैं।
पोलर नाइट की अनोखी सुंदरता:
हालाँकि सूरज नहीं उगता, लेकिन आसमान नीला, बैंगनी और गुलाबी रोशनी के बेहद खूबसूरत रंगों से भर जाता है। इसके अलावा, इसी समय नॉर्दर्न लाइट्स (Aurora Borealis) सबसे ज्यादा दिखाई देती हैं, जो इस अंधकार को जादुई बना देती हैं।
65 दिन की यह अनोखी रात प्रकृति की अनूठी व्यवस्था का एक अद्भुत उदाहरण है। यह हमें सिखाती है कि पृथ्वी कितनी विविध और रहस्यमयी है। ऐसे प्राकृतिक चमत्कार दुनिया भर के यात्रियों और शोधकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं।
