रूसी तेल पर US-चीन आमने-सामनेरूसी तेल पर US-चीन आमने-सामने

अकांक्षा सिंह, भोपाल: अमेरिकी संसद में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले बिल को मंजूरी मिलने के बाद चीन ने इसका विरोध किया है। बीजिंग ने अमेरिकी कदम को एकतरफा दबाव बताते हुए कहा है कि देशों के बीच सामान्य व्यापार में बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की सख्ती अब और बढ़ती दिखाई दे रही है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार, 16 सितंबर को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को 262-159 वोटों से मंजूरी दे दी। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। यह विधेयक पहले ही अमेरिकी सीनेट से मंजूर हो चुका है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है।

रूस पर अमेरिकी टैरिफ़, चीन का विरोध

इस पूरे मामले में चीन इसलिए अहम है क्योंकि वह रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। प्रस्तावित कानून का मकसद रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को की आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है। कानून में चीन और भारत जैसे रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन देशों के सामान पर अभी से 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ में होगा।

अमेरिकी कदम पर चीन ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि बीजिंग ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में आधार नहीं है या जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी हासिल नहीं है। चीन का कहना है कि दूसरे देशों के साथ उसका सामान्य व्यापार किसी तीसरे देश के दबाव या हस्तक्षेप के अधीन नहीं होना चाहिए।

आगे क्या होगा?

अब निगाह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम पर है। अगर विधेयक कानून बनता है और उसमें दिए अधिकारों का इस्तेमाल किया जाता है, तो चीन समेत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी व्यापारिक दबाव बढ़ सकता है। वहीं, बीजिंग का विरोध इस मुद्दे को सिर्फ रूस-अमेरिका विवाद तक सीमित नहीं रखता, बल्कि इसे अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और कूटनीतिक तनाव के एक और मुद्दे के रूप में भी सामने लाता है।

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