अंजली मिश्रा ,नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026: देश के प्रमुख जलाशयों में पानी की उपलब्धता 10 साल के औसत स्तर से नीचे दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता का करीब 70 प्रतिशत पानी उपलब्ध है, जबकि पिछले 10 वर्षों का औसत 76.62 प्रतिशत रहा है। इससे देश के विभिन्न हिस्सों में जल संसाधनों की स्थिति पर ध्यान बढ़ गया है।

औसत से करीब 6.62 प्रतिशत अंक कम
मौजूदा जल उपलब्धता 10 साल के औसत की तुलना में लगभग 6.62 प्रतिशत अंक कम है। जलाशयों में पानी का स्तर खेती, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए जल भंडार में होने वाले बदलाव का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण
भारत में बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए जलाशयों और नदियों पर निर्भर हैं। जलाशयों में पर्याप्त पानी रहने से सिंचाई व्यवस्था को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, कम जल भंडारण की स्थिति में आने वाले महीनों में पानी के प्रबंधन को लेकर अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता हो सकती है।

पेयजल और बिजली उत्पादन पर भी असर
जलाशयों का पानी कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ जलविद्युत उत्पादन में भी इस्तेमाल होता है। इसलिए जल भंडारण में कमी केवल कृषि ही नहीं, बल्कि घरेलू जल आपूर्ति और ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राज्यों में स्थिति अलग-अलग
देशभर में जलाशयों की स्थिति एक जैसी नहीं होती। वर्षा, मानसून की अवधि, स्थानीय जल मांग और जलाशयों की क्षमता के आधार पर अलग-अलग राज्यों में जल उपलब्धता में अंतर रहता है। ऐसे में राष्ट्रीय औसत को किसी एक राज्य की स्थिति का सीधा प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
जल संसाधनों के मौजूदा स्तर को देखते हुए आने वाले समय में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपलब्ध पानी के प्रभावी प्रबंधन पर जोर महत्वपूर्ण रहेगा।

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