Muskan Garg: देश में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच, उत्तर प्रदेश पुलिस और उत्तराखंड पुलिस सहित कई राज्यों में अवैध घुसपैठियों (अवैध आगमनकर्ताओं या घुसपैठियों) पर नज़र रखने और उन पर कार्रवाई तेज करने की योजनाएँ बनाई गई हैं और राज्य सरकारें भी इस दिशा में सुरक्षा और सत्यापन को बढ़ावा देने लगी हैं।
उत्तर प्रदेश: “डिटेंशन-सेन्टर + बायोमेट्रिक प्रोफाइलिंग”:
उत्तर प्रदेश सरकार ने हर जिले में अस्थायी और कुछ स्थानों पर स्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश दिया है, जहाँ ऐसे लोग रखे जाएंगे जिनकी कानूनी औपचारिकताएँ नहीं पाई गईं। इसके साथ ही एक व्यापक पहचान अभियान शुरू हुआ है, जिसमें संदिग्धों के फिंगरप्रिंट, दस्तावेज़, निवास स्थिति आदि की जाँच-परख की जाएगी। सरकार ने बयान दिया है कि अवैध प्रवासियों, विशेषकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ “सर्जिकल स्ट्राइक” की तैयारी हो चुकी है।
उत्तराखंड: “दस्तावेज जाँच + अवैध अतिक्रमण पर रोक”:
उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने घोषणा की है कि राज्य में फर्जी पते, फर्जी आधार या अन्य फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रह रहे किसी भी विदेशी नागरिक को नहीं बख्शा जाएगा। पुलिस विभाग को इसके लिए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। राज्यभर में विशेष सत्यापन अभियान शुरू हो चुका है, जिसमें विदेशी नागरिकों की पहचान, निवास स्थिति और दस्तावेजों की जाँच होगी। इसके अलावा, अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है, जैसा कि कुछ सरकारी ज़मीनों पर बने अवैध भवनों व मजारों को ध्वस्त करने की हालिया घटनाओं से देखा भी गया है।
क्यों हो रही है यह सख्ती?
अधिकारियों का कहना है कि अवैध घुसपैठियों की मौजूदगी से “नव–डेमोग्राफी”, सामाजिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। इसीलिए इन पहलों को राष्ट्रीय और राज्य सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। फर्जी दस्तावेज़ों, नकली पहचान और ग़रीब इलाकों में काम करने वाले मजदूरों के माध्यम से छिपकर रह रहे लोगों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।
आगे क्या क्या हो सकता है?
वर्तमान परिस्थितियों से पता चलता है कि आगामी महीनों में राज्यों द्वारा अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज़ और अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाए जाएंगे, चाहे वह पहचान अभियान, बायोमेट्रिक डेटा की तैयारी या डिटेंशन-सेंटर की स्थापना हो। इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल अवैध प्रवासियों को पकड़ना है, बल्कि राज्य की सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और स्थानीय लोगों के हितों को बचाना भी है।
