कामना कासोटिया भोपाल:

सिरोंज के विधायक उमाकांत शर्मा: किसान से लेकर विकास के पुरोधा तक

सिरोंज (विदिशा) — भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री उमाकांत शर्मा ने अपने जीवन और राजनीतिक सफर से यह साबित किया है कि सादा जीवन, उच्च विचार और जनता के बीच रहने का जीवन निर्वाह कम नहीं है। 28 मार्च 1964 को सिरोंज में जन्मे उमाकांत शर्मा वहन करते हैं कृषि का पेशा, लेकिन उनका उदेश्य हमेशा से रहा है क्षेत्र के लोगों की सेवा करना — चाहे शिक्षा हो, समाज सेवा हो या विकास की पहल।

प्रारंभिक जीवन और सामाजिक जुड़ाव

चन्द्रमोहन शर्मा के पुत्र उमाकांत शर्मा ने अपनी शिक्षा कला स्नातक तक पूरी की। वे अविवाहित हैं। शिक्षा के दौरान ही समाज सेवा की ओर झुकाव हुआ — 1974 से स्वयं सेवक, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से नगर मंत्री रहे। जनता पार्टी और बाद में भाजपा से जुड़े, 1987-1992 में विद्या भारती के संभाग निरीक्षक, और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ विदिशा नगर कार्यवाह रहे।

उन्होंने राजनीति की नींव रखी — शिक्षक प्रकोष्ठ, जिला अध्यक्ष का पद संभाला, और 2011 के बाद से लगातार प्रदेश कार्य समिति के सदस्य बने।

चुनावी जीत और मतों से हासिल की सफलता

सन् 2018 में पहली बार उमाकांत शर्मा 15वीं विधानसभा के सदस्य बने। लेकिन उनके राजनीतिक करियर की एक बड़ी उपलब्धि बनी विधानसभा चुनाव 2023। इस चुनाव में उन्होंने सिरोंज विधानसभा क्षेत्र (नाम, संख्या 147, जिला विदिशा) से भारतीय जनता पार्टी की झंडा लहराया।

  • कुल मतदाता: करीब 4,43,506
  • कुल मतदान हुआ: लगभग 1,77,584 मत
  • जीत का अंतर (वोटो से): लगभग 27,682 वोट
  • जीत का प्रतिशत अंतर: करीब 15.6%

यह अंतर दर्शाता है कि जनता ने उन्हें अधिक आत्मीयता और भरोसा दिया।

विकास कार्य एवं क्षेत्रीय पहलें

विधायक उमाकांत शर्मा ने अपने क्षेत्र सिरोंज-लटेरी में विकास के कई काम कराये हैं, जिनकी कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  1. सड़क निर्माण
    मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से 18 सड़कों के निर्माण की स्वीकृति मिली है। इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 42.20 किलोमीटर है।
    खासकर लटेरी विकास खंड में 9 सड़कों की स्वीकृति हुई, जिनकी लागत लगभग 10 करोड़ 85 लाख रुपये और लंबाई 24 किलोमीटर है।
  2. जल समस्या पर कार्रवाई
    सिरोंज क्षेत्र में पानी की कमी की समस्या को लेकर उन्होंने तहसील कार्यालय और एसडीएम के पास ज्ञापन सौंपा, और सार्वजनिक झड़पों में हाथ जोड़कर निवेदन किया कि जल संकट को गंभीरता से लिया जाए।
  3. जन समस्या निवारण शिविर
    नगर क्षेत्र की नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर शिविर आयोजन किया। वहां बिजली, वास्ते आवास योजना, राजस्व, सम्बल योजना आदि से जुड़ी शिकायतों को सीधे सुना गया और प्रमुख विभागों को निर्देश दिए गए कि दस दिनों के अंदर इनका समाधान हो।
  4. वेतन-भत्ता त्याग
    हाल ही में उमाकांत शर्मा ने एक अहम निर्णय लिया कि विधायक के पद का वेतन, भत्ते एवं पेंशन नहीं लेंगे। उन्होंने यह कदम राजनीति में सुचिता व पारदर्शिता लाने की भावना से उठाया है।
  5. प्रशासनिक मांगें
    सिरोंज-लटेरी को नया जिला बनाने की मांग उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर की है ताकि प्रशासनिक सुविधा बढ़े और क्षेत्र को विकास की अधिक गति मिल सके। साथ ही कुछ तहसीलों की स्थिति, रेल लाइन सर्वे और अन्य स्थानीय स्वास्थ्य-शिक्षा-बुनियादी ढाँचे की सुधार की मांगें भी उन्होंने उठाईं हैं।

व्यक्तित्व, नेतृत्व और चुनौतियाँ

उमाकांत शर्मा का व्यक्तित्व लोगों के बीच काफी जमीन से जुड़ा है। कृषि से जुड़े होने के कारण किसानों की परेशानियाँ, ग्रामीणों की आवश्यकताएँ उन्हें करीब से दिखती हैं। उदाहरण स्वरूप, जब पानी नहीं आ रहा था या नल-जल योजनाएँ काम नहीं कर रहीं थीं, तब उन्होंने जनता के साथ मिलकर प्रशासन पर दबाव बनाया। एक घटना में उन्होंने हाथ जोड़कर एसडीएम के समक्ष पानी की समस्या दूर करने की गुहार लगाई — यह दर्शाता है कि विरोध करने या आवाज उठाने दोनों ही मार्ग उनके लिये स्वीकार्य हैं जब जनता को राहत की जरुरत हो।

फिर भी चुनौतियाँ कम नहीं हैं — बजट वितरण, अधिकारियों की जवाबदेही, समय पर काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, छोटे-गांवों में सड़क-पानी-बिजली की बुनियादी सुविधाएं पहुँचाना आदि।

विधायक उमाकांत शर्मा ने सिरोंज व आसपास के क्षेत्र में जनता से जुड़ी समस्याओं को खुद महसूस किया और राजनीतिक माध्यम से समाधान खोजने की कोशिश की है। चुनावी जीत ने उन्हें जनमानस में स्वीकृति दिलाई है और विकास कार्यों ने उनकी छवि को मजबूत किया है।

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