रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो Youth में ही अपनी अलग पहचान बना लेते हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में ऐसा ही एक नाम है – मंजू राजेन्द्र दादु, जो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नेपानगर विधानसभा क्षेत्र (क्र. 179) का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 2023 में लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद, उन्होंने अपने क्षेत्र में एक सक्रिय और जनता से जुड़ी नेता के रूप में अपनी जगह बना ली है।
शुरूआती जीवन और पढ़ाई
मंजू राजेन्द्र दादु का जन्म 12 जून 1989 को मध्य प्रदेश के कखनार, बुरहानपुर जिले में हुआ था। उनके पिता, श्री राजेन्द्र दादु, स्थानीय स्तर पर बहुत जाने-माने हैं। अविवाहित रहते हुए भी, मंजू दादु ने अपना जिंदगी समाज सेवा और राजनीति को समर्पित कर दी है।
उन्होंने बी.बी.ए. (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने समाज सेवा और सार्वजनिक कार्यों में गहरी रुचि दिखाई। पढ़ाई के साथ-साथ उनके शौक़, खेल-कूद, पढ़ाई और खाना पकाने की कला भी हैं। इन सबने उनके व्यक्तित्व को संतुलित और बहुआयामी बनाया।
राजनीति में शुरुआत
उनकी राजनीतिक शुरुआत आदिवासी सेवामंडल, भोपाल से हुई, जहां वे सह सचिव रहीं। इस तरह की भूमिका ने उन्हें जनता के साथ जुड़ने का अवसर दिया और आदिवासी समुदाय की समस्याओं को करीब से समझने का मौका मिला।
उनका राजनीतिक सफर तेज़ी से बढ़ा जब नवंबर 2016 में नेपानगर विधानसभा का उपचुनाव हुआ। भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और उन्होंने भारी वोटों से जीत हासिल की, जिससे पहली बार विधायक बनने का गौरव मिला। विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ 5 दिसंबर 2016 को ली गई। बाद में, दिसंबर 2021 में, उन्हें कृषि विपणन बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया, जिसमें उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी मिला। इससे उनकी बढ़ती राजनीतिक इज्जत और पार्टी की भरोसेमंदगी का संकेत मिला।
2023 में शानदार जीत
2023 के विधानसभा चुनाव ने साबित कर दिया कि मंजू दादु का भरोसा जनता में काफी मजबूत है।
- उन्होंने 1,13,400 वोटों पाई हैं।
- कांग्रेस उम्मीदवार से 44,805 वोटों का भारी अंतर से जीत हासिल की।
- यह उनकी जीत ही नहीं, बल्कि जनता का भरोसा भी दर्शाता है।
इसके अलावा, लगातार दूसरी बार जीतने से साफ हो गया कि जनता उन्हें सिर्फ भाजपा प्रत्याशी के रूप में नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व को भी पसंद करती है।
कार्य और उपलब्धियाँ
मंजू दादु अपने राजनीतिक सफर में कई अहम चीजों पर खास ध्यान दीं।
–आदिवासी समुदाय के लिए काम
- शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं उनके इलाकों तक पहुंचाने की कोशिशें कीं।
- अनुसूचित जनजाति मोर्चे की प्रदेश कमेटी में रहकर आदिवासी हितों की आवाज़ उठाई।
–कृषि और किसानों के लिए योजनाएं
- किसानों के उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए मंडियों में सुधार किए।
- कृषि विपणन बोर्ड की अध्यक्ष रहते हुए किसानों के हित में नई नीतियां बनाईं।
- मूल्य समर्थन और सिंचाई सुविधाओं पर लगातार काम किया।
–युवा और महिलाओं के लिए कोशिशें
- स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया।
- स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार के प्रोग्राम्स में युवाओं को शामिल किया।
- महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और भागीदारी बढ़ाने के लिए कार्यक्रम चलाए।
–स्थानीय विकास
- गौरवशाली सड़कों, बिजली और पानी जैसी जरूरतों को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
- ग्रामीण हेल्थ सेंटर और स्कूलों की स्थिति में सुधार लाए।
विवाद और आलोचनाएँ
हालांकि मंजू दादु ने बहुत काम किया है, लेकिन उन्हें कई विवादों और चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा।
- अनुभव पर सवाल: 2016 में पहली बार विधायक बनने पर विपक्ष ने कहा कि उनके पास तजुर्बा नहीं है।
- विकास की रफ्तार: कुछ इलाकों में बिजली, पानी और सड़क के प्रोजेक्ट्स अपेक्षा के मुताबिक नहीं बढ़ पाए।
- आदिवासी योजना का लाभ: अक्सर शिकायतें आईं कि ग्रामीण और पिछड़े आदिवासी इलाकों तक सरकारी सुविधाएं कम पहुंच रही हैं।
- पार्टी और जनता की उम्मीदें: कभी-कभी भाजपा की योजनाओं और क्षेत्र की जरूरतों के बीच मेल बैठाना मुश्किल रहा।
मंजू राजेन्द्र दादु का राजनीतिक सफर यह दिखाता है कि मेहनत, जनता से जुड़ाव और जमीन से जुड़ी समझ से राजनीति में सफलता मिलती है। एक मामूली आदिवासी परिवार से निकलकर उन्होंने भाजपा के टिकट पर दो बार विधानसभा पहुंचने का मानक कायम किया।
उनकी दूसरी जीत के साथ ही लोगों की उम्मीदें भी दोगुनी हो गई हैं। अब देखना है कि वे जमीन से जुड़ी समस्याओं—किसानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे—को कैसे हल करती हैं।
अगर वो ऐसा कर लेती हैं, तो आने वाले समय में मंजू दादु सिर्फ एक विधायक नहीं, बल्कि आदिवासी समाज और नेपानगर की तरक्की का प्रतीक बन जाएंगी।
