रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय राजनीति में समय-समय पर ऐसे जनप्रतिनिधि उभरते हैं जो आम जीवन से आते हैं और अपने क्षेत्र की जनता की आवाज़ बन जाते हैं। मध्य प्रदेश की पंधाना विधानसभा (178-ST) से वर्ष 2023 में पहली बार निर्वाचित हुईं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक श्रीमती छाया गोविंद मोरे ऐसी ही नेता हैं, जिन्होंने समाज सेवा से लेकर राजनीति तक अपनी अलग पहचान बनाई है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

श्रीमती छाया गोविंद मोरे का जन्म 2 अगस्त 1976 को खंडवा ज़िले के बमनाला गाँव में हुआ। उनके पिता का नाम स्वर्गीय श्री सुपडु मासरे थे। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी छाया मोरे ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने बी.ए. तक पढ़ाई की। यद्यपि उनका शैक्षणिक सफर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन अध्ययन और सीखने की प्रवृत्ति उनके जीवन का अहम हिस्सा रही।

मोर का निजी जीवन

छाया मोरे का विवाह श्री गोविंद मोरे से हुआ। वे एक पुत्री की माता हैं। कृषक परिवार से संबंध रखने के कारण उन्हें खेती और ग्रामीण जीवन की वास्तविक समस्याओं को समझने का अवसर मिला। खेती-बाड़ी में सक्रिय रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि किसानों की कठिनाइयों का समाधान केवल व्यक्तिगत स्तर पर संभव नहीं है, इसके लिए नीतिगत निर्णय और प्रभावी राजनीतिक भागीदारी आवश्यक है।

राजनीति में प्रवेश

राजनीति में प्रवेश से पहले छाया मोरे समाज सेवा से जुड़ी रहीं। गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर काम करना उन्हें जनता से जोड़ता गया। यही जनसंपर्क उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

सन् 2023 में भाजपा ने उन्हें पंधाना विधानसभा सीट से टिकट दिया। यह चुनाव उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि कांग्रेस की ओर से मजबूत प्रत्याशी मैदान में थे। लेकिन क्षेत्र में उनकी सादगी, सहजता और जनता से निकटता ने उन्हें चुनाव जीतने में मदद की।

2023 चुनाव परिणाम और वोटों के आँकड़े

पंधाना विधानसभा चुनाव 2023 में छाया गोविंद मोरे ने शानदार जीत दर्ज की।

  • कुल प्राप्त वोट (भाजपा) : 1,23,332
  • वोट प्रतिशत : 54.78%
  • कांग्रेस प्रत्याशी (रुपाली नंदू बरे) : 94,516 वोट, 41.98%
  • जीत का अंतर : 28,816 वोट

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि छाया मोरे ने न केवल चुनाव जीता बल्कि अपने प्रतिद्वंद्वी पर अच्छा खासा अंतर भी बनाया।

कार्य और उपलब्धियाँ

हालांकि विधायक के रूप में उनका कार्यकाल अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है:

  1. कृषि और किसान
    • किसानों को समय पर बीज, खाद और सिंचाई की सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
    • फसल बीमा योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में पहल।
  2. महिला सशक्तिकरण
    • महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूहों (SHG) को बढ़ावा देना।
    • कन्या शिक्षा और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन।
  3. शिक्षा और स्वास्थ्य
    • ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों और आंगनबाड़ियों की स्थिति सुधारने की योजना।
    • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को सक्रिय करने की दिशा में कदम।
  4. बुनियादी ढांचा
    • सड़कों और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत बनाने पर जोर।
    • पेयजल संकट वाले गांवों में योजनाएँ शुरू करना।

विवाद और चुनौतियाँ

हर नेता के साथ कुछ विवाद और चुनौतियाँ जुड़ी रहती हैं। छाया मोरे भी इससे अछूती नहीं हैं:

  1. अनुभवहीनता का आरोप
    • चूंकि वे पहली बार विधायक बनी हैं, विपक्ष ने उन्हें अनुभवहीन बताते हुए निशाना साधा।
    • कहा गया कि उन्हें विधानसभा की कार्यप्रणाली समझने में समय लगेगा।
  2. विकास कार्यों की गति
    • कुछ ग्रामीणों ने शिकायत की कि चुनाव के बाद विकास कार्यों की रफ्तार अपेक्षानुसार तेज़ नहीं है।
    • बिजली और पानी जैसी सुविधाओं पर जनता की नाराज़गी सामने आई।
  3. कृषि नीतियों पर आलोचना
    • किसानों का कहना है कि योजनाओं की जानकारी और लाभ तक पहुँचने में प्रक्रियाएँ जटिल हैं।
    • विपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा किसानों के मुद्दों को केवल चुनावी भाषणों तक सीमित रखती है।

छाया मोरे के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे जनता की उम्मीदों पर खरी उतरें। यदि वे अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को प्राथमिकता देती हैं और भ्रष्टाचार से दूर रहते हुए पारदर्शी तरीके से योजनाओं को लागू करती हैं, तो वे आने वाले वर्षों में न केवल पंधाना बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा नाम बन सकती हैं।

उनके सामने अवसर भी है कि वे महिलाओं के लिए आदर्श बनें। एक साधारण महिला से विधायक बनने तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में मेहनत और जनता से जुड़ाव सबसे बड़ा हथियार है।

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