रिपोर्ट, काजल जाटव: श्री रामेश्वर शर्मा एक बहुत ही वरिष्ठ नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं, और उनका जीवन देश की सेवा और जनता के हित के लिए पूरी तरह से समर्पित रहा है। उनका जन्म 5 जुलाई, 1970 को विदिशा जिले के सराख गांव में हुआ था। शुरुआती जीवन तो बहुत साधारण रहा, लेकिन उनका राजनीतिक और सामाजिक सफर थोड़ा अलग ही रहा है। उनकी पत्नी संगीता शर्मा एक वकील हैं, और उनके दो बेटे भी हैं। उनका परिवार उनके सार्वजनिक जीवन की मजबूती का बड़ा हिस्सा रहा है।

बचपन और संघ से जुड़ाव

श्री रामेश्वर शर्मा ने अपने छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की। संघ के विचार और सिद्धांतों ने उनके व्यक्तित्व को बहुत प्रभावित किया, जिससे उनमें देशभक्ति, अनुशासन और सेवा की भावना गहरी हो गई। उन्होंने संघ का पहला, दूसरा और तीसरा साल का प्रशिक्षण भी लिया, जो स्वयंसेवकों के लिए बहुत अहम माना जाता है।

संघ के प्रचारक के तौर पर, उन्होंने गंगा जल कलश यात्रा जैसी गतिविधियों में भी हिस्सा लिया, जिससे उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ने का मौका मिला। बाद में, वे भोपाल में बजरंग दल के प्रमुख भी बनें, जहां उन्होंने युवाओं को संगठित करने और सामाजिक-धार्मिक कामों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

राजनीतिक शुरुआत

1993 में, रामेश्वर शर्मा ने भाजपा की सक्रिय सदस्यता शुरू की। उनकी संगठन कौशल देखकर, उन्हें युवामोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश सदस्यों में शामिल कर लिया गया। वे कश्मीर बचाने जैसे आंदोलन भी किए, ये दिखाता है कि उनमें देशभक्ति का जज्बा कितनी गहरी है।

1995 में, उन्हें पहली बार भोपाल के वार्ड नंबर 33 से नगर निगम का पार्षद चुना गया। यह उनकी राजनीति में एक बड़ा कदम था। फिर, 2000 में, फिर से वे वहीं से पार्षद चुने गए और नगर निगम में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी भी निभाई। विपक्ष के नेता रहते हुए, उन्होंने लोगों की समस्याओं को उठाया और अपनी बात मजबूती से रखी।

पार्टी और सरकार में पद

अपने करियर में, रामेश्वर शर्मा ने कई अहम पद संभाले हैं:

  • 2005: भाजपा के नगर विकास विभाग के प्रदेश प्रमुख।
  • 2006 और 2010: भाजपा की राज्य कार्यकारिणी में मंत्री पद।
  • 2011: राज्य खनिज निगम के अध्यक्ष (मंत्रालय स्तरीय), जहां उन्होंने खनिज क्षेत्र के विकास में मदद की।
  • 2012: भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता, जहां उन्होंने पार्टी की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाया।

विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व

श्री रामेश्वर शर्मा ने 2013 में पहली बार 14वीं विधानसभा में जीत हासिल की थी, जब उन्होंने हुज़ूर (155) निर्वाचन क्षेत्र से अपने कदम रखे। फिर 2018 में, उन्होंने फिर से उसी सीट से जीत दर्ज की, और 2023 में तो उन्होंने तीसरी बार जीतकर अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली।चुनावी नतीजे:

2023 के विधानसभा चुनाव में, श्री रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस के नरेंद्र सिंह पटेल को भारी वोटों का अंतर देकर हरा दिया। यह जीत न सिर्फ उनकी पॉपुलैरिटी का शानदार साक्षी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि गोविंदपुरा के लोग उनके नेतृत्व से खुश हैं और उनके कामों को मानते हैं। विजय का फासला: 70,069 वोट।

विवाद और उनका असर

उनका राजनीतिक जीवन कुछ विवादों से खाली नहीं रहा, ज्यादातर उनके बोलने का अंदाज और लड़ाकू शैली की वजह से उभरे हैं।

  • नर्मदा जल आंदोलन: भोपाल में नर्मदा का पानी लाने के लिए उन्होंने एक आंदोलन और पदयात्रा का नेतृत्व किया, जो मशहूर हुआ, लेकिन इसके सही क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठे।
  • राम मंदिर पर बयान: राम मंदिर बनाने को लेकर उनके कुछ बयान विवादित रहे। उन्होंने कहा था कि “राम मंदिर का निर्माण पूरे विश्व में अयोध्या में ही होगा, और जो नहीं देगा वो बर्बाद हो जाएगा।” इन बयानों का विपक्ष ने खूब विरोध किया।
  • भूमि विवाद: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके परिवार की जमीन पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के आरोप भी लगे हैं। हालांकि, इन बातों की पुष्टि या कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
  • कोविड-19 पर टिप्पणी: महामारी के समय, उन्होंने एक बयान दिया जिसमें कहा था कि “जो कोरोना से मर रहे हैं, वो मर रहे हैं, जो बचेंगे वही बचेंगे, हमें जो करना है, वही कर रहे हैं।” इस बयान से बहुत विवाद हुआ।

इन सभी विवादों के बावजूद, श्री रामेश्वर शर्मा का राजनीतिक सफर लगातार सफलताओं से भरा रहा है। यह उनके मजबूत संगठन, पार्टी के भीतर की पकड़ और जनता के साथ सीधे जुड़ाव का ही नतीजा है।

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