रिपोर्ट, काजल जाटव: गरीबी और संघर्ष से भरे रास्तों से होकर राजनीति में कदम रखने वाले कई नेता होते हैं, और आगर मालवा जिले के सुसनेर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार 2023 में चुने गए भैरो सिंह प्रजापति भी इसी राह पर चलने वाले हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के ये युवा नेता अपनी सामान्य पृष्ठभूमि से निकल कर इलाके की राजनीति में अपनी एक ठोस जगह बना चुके हैं।

शुरुआती जिंदगी और पढ़ाई

भैरो सिंह का जन्म 31 जुलाई 1971 को सुसनेर, आगर मालवा में हुआ। उनके पिता का नाम श्री उदय सिंह परिहार है। उनका पालन-पोषण एक खेती-किसानी करने वाले परिवार में हुआ। भैरो सिंह ने अपनी पढ़ाई 11वीं तक ही की, लेकिन अपने व्यवहार और सामाजिक समझ के दम पर उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

वे शादीशुदा हैं, उनकी पत्नी श्रीमती रमेश कुंवर और श्रीमती मेघा कुंवर हैं। उनके चार बच्चे हैं – दो बेटे और दो बेटियां। निजी जिंदगी में वे साहित्य और संगीत में रुचि रखते हैं।

राजनीति में कदम

भैरो सिंह ने लंबे समय तक स्थानीय राजनीति में हिस्सा लेते हुए जनता के बीच अपने ईमानदार किसान नेता के रूप में अपनी छवि बनाई। उनका सरल जीवन और सहज स्वभाव ग्रामीण मतदाताओं के बीच खासा लोकप्रिय रहा।

2023 में कांग्रेस ने उन्हें सुसनेर विधानसभा सीट का टिकट दिया। उस चुनाव में उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार को कड़ा मुकाबला देते हुए पहली बार विधायक के तौर पर जीत हासिल की।

विधानसभा में काम और जनता का समर्थन

विधानसभा में अपना पहला कदम रखते ही भैरो सिंह ने किसान, सिंचाई, सड़क और ग्रामीण आजीविका जैसे मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाई।

  • उन्होंने छोटे किसानों के लिए खाद और बीज की व्यवस्था, सिंचाई योजनाओं का बेहतर संचालन और बिजली की आपूर्ति को लेकर कई बार सरकार से सवाल किए।
  • उन्होंने युवकों के लिए रोजगार मेले और ट्रेनिंग सेंटर की मांग भी उठाई।
  • सुसनेर क्षेत्र की सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं के सुधार के लिए उन्होंने विधानसभा में पार्टी के समर्थन के साथ सरकार को संदेश दिए।

खासतौर पर, ग्रामीण इलाकों में पीने का पानी की समस्या को उन्होंने जोरदार तरीके से उठाया। अक्सर कहा कि पानी और रोजगार की समस्याओं को हल किए बिना गांवों से पलायन नहीं रुकेगा।

विकास कार्य

विधानसभा सदस्य बनते ही भैरो सिंह ने अपने इलाके में कुछ खास तरह के विकास के काम शुरू किए—

1. सड़कें बनवाना – आगर मालवा के कई गांवों को मुख्य रास्ते से जोड़ने के लिए उन्होंने साफ़ तौर पर कोशिश की। 

2. किसानों की मदद – किसानों के लिए ऋण माफ़ी जैसी योजनाओं पर काम किया और सहकारी समितियों को मजबूत बनाया। 

3. स्कूल और अस्पताल – ग्रामीण स्कूलों में टीचर और अस्पतालों में डॉक्टर्स की कमी को दूर करने का प्रयास किया। 

4. युवा उठाव – खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर युवाओं में ऊर्जा भरी। 

विवाद स्थिति

हमें पता है कि कुछ विवाद भी रहे हैं, फिर भी उनका नाम साफ-सुथरा माना जाता है। फिर भी, उनके राजनीतिक जीवन में कुछ विवाद भी जुड़ गए—

टिकट को लेकर विवाद – 2023 के चुनाव में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उन्हें उम्मीदवार बनाने का विरोध किया। आरोप था कि उन्हें अचानक टिकट मिला, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया। • विकास में देरी – विपक्ष का कहना है कि सड़कें और सिंचाई के काम अभी भी अधूरे हैं और जनता को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। 

राजनीति में लड़ाई-झगड़ा – कुछ बार पंचायत और नगर निकाय स्तर पर उनके समर्थक और विरोधी भिड़ गए, जिससे छवि पर असर पड़ा। 

इन बातों के बावजूद, भैरो सिंह जनता के पास अच्छी पकड़ बनाए हुए हैं और सीधे बात करने में भरोसा रखते हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत है उनकी जमीनी मौजूदगी। वे गांव-गांव जाकर सीधे किसानों और मजदूरों से मिलते हैं। अक्सर कहते हैं— “मैं राजनीति में जनता की सेवा करने आया हूं, पद पाने के लिए नहीं।” 

जनता से जुड़ाव

उन्हें जनता से जुड़ाव और छोटी छोटी समस्याओं का त्वरित समाधान करना काफी अच्छा लगता है, जिससे वो लोगों के और करीब आ गए हैं। भैरो सिंह का राजनीतिक सफर अभी शुरुआत ही है, लेकिन जो छवि उन्होंने बहुत कम समय में ईमानदार और संघर्षशील नेता की बनाई है, उससे दिख रहा है कि भविष्य में वे मध्य प्रदेश की राजनीति में और बड़ा रोल निभा सकते हैं।

उनकी सबसे बड़ी ताकत है उनका सादगीभरा स्वभाव, किसान से जुड़ाव और ग्रामीण जीवन की गहरी समझ। चुनौतियां चाहे कितनी भी हों, अगर वे जनता के साथ बने रहे और विकास के काम तेजी से किए, तो न केवल सुसनेर बल्कि पूरे आगर मालवा जिले में भी वे एक मजबूत नेता बन सकते हैं।

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