रिपोर्ट, काजल जाटव: रंगभेद जैसी सामाजिक समस्याओं के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने वाली पूर्व मिस पुडुचेरी, सैन रेचल उर्फ शंकर प्रिया गांधी ने हाल ही में अपनी जिंदगी खत्म कर ली। 26 साल की सैन, जो ‘मिस डार्क क्वीन तमिलनाडु 2019′ और ‘मिस पुडुचेरी 2020–21‘ जैसे कई प्रसिद्ध खिताब जीत चुकी थीं, 12 जुलाई को पुडुचेरी के अस्पताल में हार मान गईं।
संघर्षों से बना आत्मबल
उनकी जिंदगी आसान नहीं रही। जन्म से ही उन्हें अपने रंग को लेकर समाज और अपने ही परिवार से आलोचना का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इस सोच को बदलने का फैसला किया। उनके विचार इतने मजबूत थे कि एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था—‘गहरे रंग का होना कोई अभिशाप नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की निशानी है।’
उन्होंने सिर्फ रंगभेद के खिलाफ आवाज नहीं उठाई, बल्कि उस सोच को भी चुनौती दी जो ब्यूटी को सिर्फ गोरे रंग में देखती है। सैन ने मॉडलिंग में अपनी अलग पहचान बनाई और ‘क्वीन ऑफ मद्रास 2022–23‘ जैसे खिताब भी अपने नाम किए।
सैन ने चेन्नई, बेंगलुरु और पुडुचेरी में कई फैशन शोज़ में हिस्सा लिया और अपने मॉडलिंग करियर को खुद से ही आगे बढ़ाया। सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहीं, खासकर इंस्टाग्राम पर अपने पोस्ट्स और वीडियो के जरिए उन्होंने समाज में फैली रंगभेदी सोच का खुलकर विरोध किया। उनके विचारों को हजारों लोगों का प्यार और समर्थन मिला, और वो युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गईं। इसके अलावा, वो महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता को लेकर कई तरह की गतिविधियों में शामिल होती थीं।
उन्होंने लोकल लेवल पर कई ब्यूटी और फैशन इवेंट्स भी ऑर्गनाइज़ किए, जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया। आत्महत्या और जांच 5 जुलाई को उन्होंने ज़्यादा मात्रा में नींद की गोलियां ले ली। जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो पहले सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर एक प्राइवेट अस्पताल में और अंत में JIPMER अस्पताल में, वहीं 12 जुलाई को उन्होंने आखिरी सांस ली।
आत्महत्या और जांच
पुलिस को उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला जिसमें लिखा था कि इस कदम का उनके पति या परिवार का कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस और तहसील स्तर पर अभी जांच चल रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि सैन को किडनी, मानसिक तनाव और कर्ज का बोझ था। उन्हें इवेंट्स ऑर्गनाइज़ करने के लिए काफी पैसा भी लेना पड़ा था।
