रिया सिन्हा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 26 नवंबर को, संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित राष्ट्रीय संविधान दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस वर्ष भारत के संविधान को अंगीकार किए जाने की 76वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की, जिसमें उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और दोनों सदनों के सांसद सहित कई विशिष्टजन उपस्थित थे। यह आयोजन देश की लोकतांत्रिक नींव और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
बहुभाषी अनुवाद का विमोचन और प्रस्तावना का पाठ
समारोह का एक महत्वपूर्ण आकर्षण संविधान की प्रस्तावना का पाठ था, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति मुर्मू ने किया। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में, एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, भारत के संविधान के नौ भारतीय भाषाओं में अनुवादित संस्करण डिजिटल रूप से जारी किए गए। इन भाषाओं में मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओड़िया और असमिया शामिल हैं, जिससे देश के नागरिक अपनी भाषाओं में संविधान को और बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इसके अतिरिक्त, संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार की गई स्मारक पुस्तिका “भारत के संविधान में कला और कैलिग्राफी” का भी विमोचन किया गया।
न्यायपालिका और संवैधानिक मूल्यों पर संबोधन
पीएम मोदी ने संविधान दिवस के अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय परिसर में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में भी भाग लिया। यहाँ उन्होंने भारतीय न्यायपालिका की वार्षिक रिपोर्ट (2023-24) जारी की और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। अपने संबोधन में, उन्होंने देश की प्रगति में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका और नागरिकों के जीवन में संवैधानिक मूल्यों के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने संविधान को न केवल एक कानूनी दस्तावेज़ बल्कि एक मार्गदर्शक दर्शन बताते हुए, हर नागरिक से संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान किया।

