अंजली मिश्रा, भोपाल: उच्च-मूल्य वाले UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर मध्य प्रदेश के व्यापारिक संगठनों में विरोध बढ़ रहा है। भोपाल समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों में व्यापारी 23 सितंबर को प्रस्तावित ‘No UPI Day’ अभियान के समर्थन में लामबंद हो रहे हैं।
व्यापारी संगठनों के अनुसार, नए MDR ढांचे में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र person-to-merchant UPI लेनदेन पर शुल्क लागू होना है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की बात रिपोर्टों में कही गई है। हालांकि, यह शुल्क ग्राहकों से सीधे UPI शुल्क के रूप में लेने के बजाय मर्चेंट पक्ष पर लागू होगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान इस व्यवस्था से अलग रहेगा।
भोपाल में व्यापारियों ने जताया विरोध
भोपाल में चौक बाजार व्यापारी संघ सहित व्यापारिक संगठनों ने प्रस्तावित शुल्क के विरोध में ज्ञापन सौंपा है। व्यापारियों का कहना है कि छोटे और सीमित मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत चिंता का विषय है।
प्रदेश स्तर पर अभियान को व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, व्यापारिक संगठनों ने 23 सितंबर को UPI के बजाय अन्य भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करने की अपील की है। कुछ व्यापारिक संगठनों ने QR कोड और भुगतान उपकरणों को प्रतीकात्मक रूप से ढकने की भी योजना बताई है।
ग्राहक और कारोबार पर संभावित असर
व्यापारियों का तर्क है कि यदि बड़े UPI लेनदेन की लागत बढ़ती है, तो इसका असर कारोबारियों के भुगतान विकल्पों और डिजिटल लेनदेन पर पड़ सकता है। वहीं, नीति के समर्थकों का तर्क है कि नए शुल्क ढांचे का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय में अधिक टिकाऊ बनाना है।
इस बीच, UPI को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ दावों को लेकर सावधानी भी जरूरी है। Indian Oil Corporation (IOC) ने 19 सितंबर को स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर 23 सितंबर को UPI बंद करने संबंधी वायरल दावा भ्रामक है। इसलिए व्यापारियों के प्रस्तावित विरोध और पेट्रोल पंपों से जुड़े अलग-अलग दावों को एक ही घटना मानना उचित नहीं होगा।
23 सितंबर को प्रस्तावित अभियान के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश के व्यापारिक क्षेत्रों में इसका वास्तविक असर कितना पड़ता है और सरकार तथा संबंधित संस्थाएं व्यापारियों की चिंताओं पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।
