
रोहित रजक भोपाल,
मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में इस साल मानसून कमजोर रहा है। प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से 40 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और आम जनता की चिंता बढ़ गई है।
वहीं दूसरी ओर पूर्वी मध्यप्रदेश में 97 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 13 दिनों में ही पूर्वी हिस्सों में औसत से कई गुना अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
बारिश का असमान वितरण
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल एक जून से 13 जुलाई तक प्रदेश में औसतन 225.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 135.4 मिमी बारिश ही दर्ज हुई है।
इसका मतलब है कि पूरे प्रदेश में औसतन 40 प्रतिशत बारिश की कमी है। खास बात यह है कि यह कमी मुख्य रूप से पश्चिमी मध्यप्रदेश के जिलों में देखने को मिली है। वहीं, पूर्वी जिलों में जरूरत से कहीं ज्यादा बारिश हो चुकी है।
उदाहरण के लिए, भोपाल में औसत बारिश का आंकड़ा 258.3 मिमी है, लेकिन अभी तक केवल 157.3 मिमी बारिश हुई है, यानी 39 प्रतिशत की कमी।
इसी तरह रतलाम, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा जैसे जिलों में भी सामान्य से बहुत कम वर्षा हुई है।
क्यों हो रही है बारिश में कमी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार बंगाल की खाड़ी की तरफ से आया मानसून पूर्वी हिस्सों में अटक गया है और वहीं सक्रिय बना हुआ है। इसके चलते जबलपुर, शहडोल, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, उमरिया, सिवनी और कटनी जैसे जिलों में मूसलाधार बारिश हो रही है। पूर्वी जिलों में कई जगह बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं। वहीं पश्चिमी जिलों में किसान अब भी बादलों की राह देख रहे हैं।
खेती पर संकट
कम बारिश की वजह से सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ रहा है। कई जिलों में बोवनी (बुवाई) का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। जिन किसानों ने बुवाई कर दी है, वहां पानी की कमी के चलते फसलें सूखने लगी हैं।
किसान अब या तो बारिश का इंतजार कर रहे हैं या फिर वैकल्पिक उपाय जैसे सिंचाई और डीजल पंप से पानी दे रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है।
आगे क्या उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश की संभावना है, लेकिन यह कितनी असरदार होगी, यह अभी साफ नहीं है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो सूखे जैसे हालात बन सकते हैं और सरकार को राहत पैकेज देने की जरूरत पड़ सकती है।
पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले
हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में पिछले 24 घंटे में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। इनमें छतरपुर (303.0 मिमी), अनूपपुर (215.0 मिमी), डिंडोरी (197.0 मिमी), बालाघाट (186.0 मिमी), जबलपुर (179.0 मिमी), मंडला (166.0 मिमी), सिवनी (153.0 मिमी), उमरिया (142.0 मिमी) शामिल हैं।
इस बार मानसून का असमान वितरण मध्यप्रदेश में बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर पूर्वी जिलों में भारी बारिश हो रही है, वहीं पश्चिमी हिस्से सूखे की ओर बढ़ रहे हैं।
अगर जल्द संतुलन नहीं बना, तो इसका सीधा असर खेती, जलस्तर और जनजीवन पर पड़ेगा। सरकार को भी अब स्थिति पर नजर रखनी होगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत कदम उठाने होंगे।
