Suvangi Pradhan: G20 शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बीच वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह चर्चा तेज है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बार G20 बैठक में शामिल नहीं होंगे। ट्रम्प ने अपने समर्थकों के बीच एक कार्यक्रम में दावा किया कि अमेरिका और यूरोप में गोरों पर हो रहे भेदभाव जैसे मुद्दों को लेकर वे अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को अलग दिशा देना चाहते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह बयान G20 में उनकी अनुपस्थिति का प्रत्यक्ष कारण है या घरेलू चुनावी माहौल की रणनीति।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मलेन में न आने की अटकलें भी चर्चा में हैं
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद कई विशेषज्ञ मानते हैं कि पुतिन किसी ऐसे देश में यात्रा करने से बचते हैं जहाँ कानूनी जोखिम बढ़ सकता है। यह स्थिति रूस और पश्चिम रिश्तों में और तनाव जोड़ती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित अनुपस्थिति भी सुर्खियों में है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वे हाल के महीनों में स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से दूर रहे हैं। हालांकि चीन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
भारत के लिए G20 क्यों है खास
इन बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी के बीच यह सवाल उठ रहा है कि भारत के लिए इस बार का G20 क्यों खास है। भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बनकर उभरा है और जलवायु वित्त, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वैश्विक सप्लाई चेन, और खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा जैसे एजेंडे भारत की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। साथ ही, भारत को यह अवसर मिला है कि वह वैश्विक महाशक्तियों के बीच संवाद की नई राहें खोले और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी नेतृत्वकारी क्षमता को और मज़बूत करे। कूटनीतिक उतार-चढ़ावों से घिरे इस सम्मेलन से दुनिया की उम्मीदें बड़ी हैं और भारत उसके केंद्र में है
