कामना कासोटिया भोपाल:

गाँव-गाँव जाकर जनता की समस्याओं को सुलझाना इनकी पहचान

पांढुर्णा विधानसभा क्षेत्रके विधायक श्री नीलेश पुसराम उइके आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के युवा और जमीनी नेता के रूप में वे क्षेत्र में समाजसेवा, जनसंपर्क और विकास कार्यों के लिए जाने जाते हैं। सरल भाषा में बात करें तो वे जनता के बीच रहकर काम करने वाले विधायक हैं, जो क्षेत्र के लोगों की समस्याएँ सुनते हैं और उन्हें हल कराने का प्रयास करते हैं।

जन्म, शिक्षा और पारिवारिक जीवन

नीलेश उइके का जन्म 1 जनवरी 1988 को मध्य प्रदेश के छिन्दवाड़ा जिले के ग्राम रजोला रैयत में हुआ। उनके पिता श्री पुसाराम उइके एक सामान्य किसान हैं। नीलेश जी ने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की है। उनका व्यवसाय भी कृषि है, जिससे वे आज भी जुड़े हुए हैं। वे विवाहित हैं और उनकी पत्नी श्रीमती कविता उइके हैं। उनके दो बेटियाँ हैं। उनका स्थायी निवास ग्राम रजोला रैयत, तहसील मोहखेड़, जिला छिन्दवाड़ा में है।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

श्री नीलेश उइके ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय जनपद पंचायत उपाध्यक्ष के रूप में की। गांव और पंचायत स्तर से शुरू कर उन्होंने आम जनता से सीधा संवाद बनाए रखा। वर्ष 2018 में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें पांढुर्णा से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट दिया और उन्होंने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विधान सभा पहुंचे। इसके बाद 2023 के चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार प्रकाश भाऊ उइके को 10,457 मतों से हराकर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।

चुनावी आंकड़े

  • 2018 चुनाव: नीलेश उइके को 80,125 वोट मिले।
  • 2023 चुनाव: जीत का अंतर 10,457 वोट रहा।
  • उन्होंने भाजपा के उम्मीदवारों को लगातार दो बार हराकर अपनी लोकप्रियता साबित की है।

विधायक के रूप में कार्य

विधायक बनने के बाद नीलेश उइके ने क्षेत्र में कई जनहितकारी कार्यों की पहल की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, स्कूलों के जीर्णोद्धार, शासकीय योजनाओं की पहुँच बढ़ाने और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम किया है।

उनकी कोशिश रही है कि आदिवासी और पिछड़े वर्गों को शासन की योजनाओं का सीधा लाभ मिले। इसके लिए उन्होंने पंचायत स्तर पर शिविर लगवाए, हितग्राहियों की सूची बनवाई और जनप्रतिनिधियों व प्रशासन के साथ समन्वय कर योजनाओं को लागू करवाया।

जनता से जुड़ाव और कार्यशैली

नीलेश उइके की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वे अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। वे अक्सर गाँव-गाँव जाकर लोगों से मिलते हैं, चौपाल लगाते हैं और बिना किसी औपचारिकता के लोगों की समस्याएँ सुनते हैं। यही वजह है कि वे युवाओं, किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों के बीच एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं।

उनकी कार्यशैली में दिखावा कम, काम ज्यादा है। वे खुद कहते हैं, जनता ने मुझे जनसेवक बनाकर भेजा है, राजा नहीं।” यह सोच ही उन्हें आम नेताओं से अलग बनाती है।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हालांकि विकास के रास्ते में चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। क्षेत्र में अब भी कई ऐसे गाँव हैं जहाँ सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं। साथ ही, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना एक बड़ी जरूरत है।

नीलेश उइके इन चुनौतियों को स्वीकार करते हैं और उनका कहना है कि मैं क्षेत्र की समस्याओं को पूरी तरह समझता हूँ और चरणबद्ध तरीके से हर मुद्दे पर काम कर रहा हूँ। जनता का साथ रहेगा तो बदलाव जरूर आएगा।”

नीलेश पुसराम उइके का राजनीतिक सफर एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे एक किसान परिवार का बेटा मेहनत, ईमानदारी और जनसेवा के बल पर दो बार विधायक बन सकता है। उनकी सादगी, काम के प्रति निष्ठा और जनता से जुड़ाव उन्हें क्षेत्र का एक मजबूत जननेता बनाते हैं। अब देखना यह है कि आगामी वर्षों में वे अपने क्षेत्र को किस ऊँचाई तक ले जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *