कामना कासोटिया भोपाल:
परासिया के विधायक सोहनलाल वाल्मीकि – जनता की उम्मीदों की मिसाल
परासिया, छिंदवाड़ा — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से तीसरी बार परासिया (अनुसूचित जाति) निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित सोहनलाल वाल्मीकि ने न केवल वोटों से जीत दर्ज की है बल्कि जनता की आशाओं को भी अपनी राजनीति का केंद्र बनाया है। उनके चुनावी परिणामों, राजनीतिक सफर एवं विकास कार्यों को देखते हुए उनकी छवि क्षेत्र में एक सक्रिय और जनता के करीब रहने वाले नेता की बनी है।
चुनावी इतिहास और जीत का अंतर
- 2023: इस चुनाव में सोहनलाल वाल्मीकि को 88,227 वोट मिले। मुकाबले में बीजेपी की ज्योति डेहरिया को दूसरे स्थान पर 86,059 वोट मिले। उन्होंने 2,168 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
- 2018: इस वर्ष उन्होंने बीजेपी के ताराचंद बावरिया को 79,553 वोट से हराया; बावरिया को मिले वोट थे 66,819, और अंतर 12,734 वोटों का था।
- 2013: कांग्रेस के टिकट पर वाल्मीकि ने 72,235 वोट लिए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ताराचंद बावरिया को 65,373 वोट मिले; अंतर 6,862 वोटों का रहा।
- 2008: इस चुनाव में वे BJP के ताराचंद बावरिया से हार गए — सिर्फ 93 वोटों के बहुत तंग अंतर से।
इस तरह 2023 में उनकी जीत का अंतर पिछले चुनावों की तुलना में बहुत कम हो गया है, जिससे यह साफ़ है कि चुनाव मैदान पर प्रतिद्वंद्वी ने भी मतदाताओं में अच्छी पकड़ बनाई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि संक्षेप में
सोहनलाल वाल्मीकि का जन्म 29 अगस्त, 1963 को चांदामेटा में हुआ था। पिता का नाम स्व. श्री श्यामलाल वाल्मीकि है। शिक्षा की दृष्टि से उन्होंने बी.ए. प्रथम वर्ष तक की पढ़ाई की है। विवाहिता हैं श्रीमती राधा वाल्मीकि, तीन पुत्र हैं।
उनका राजनीतिक-जनहित काम व यात्रा शुरू हुई थी वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड से, एन.एस.यू.आई. से आदि, और बाद में कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी परासिया के अध्यक्ष रहे, कोयला खदान मजदूर संघ में महामंत्री रहे आदि। उन्होंने 2013 में 14वीं विधानसभा, और फिर 2018 व 2023 में 15वीं और वर्तमान विधानसभा सदस्य के रूप में निर्वाचन क्षेत्र की सेवा कर रहे हैं।
विकास कार्य और जनहित प्रयास
वर्तमान एवं पिछले कार्यकालों में सोहनलाल वाल्मीकि ने निम्नलिखित सार्वजनिक और विकास संबंधी पहलों पर ध्यान केंद्रित किया है:
- 100% वैक्सीनेशन का लक्ष्य एवं प्रोत्साहन
परासिया ब्लॉक की दो ग्राम पंचायतें — गाजनडोह और रिधौरा — 18+ आयु वर्ग के लोगों का पूरा टीकाकरण कर चुके हैं। विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने घोषणा की थी कि ऐसी पंचायतों को विकास कार्यों के लिए ₹10 लाख तक की धनराशि दी जाएगी। - स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत सुविधाएँ
चुनाव विधानसभाओं के क्षेत्र में सड़कें, बिजली, पानी, अस्पतालों या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा स्कूलों की स्थिति में सुधार की मांगें लगातार रहती हैं। सोहनलाल वाल्मीकि पिछले कार्यकालों में इन क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। (विशेषकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने, शिक्षा संसाधन बेहतर करने की पहलें) - ब्लॉक और पंचायत स्तर पर काम
पंचायतों और ब्लॉकों में जन सेवाओं, गांवों के संपर्क मार्गों, सड़क मरम्मत, जलापूर्ति व्यवस्था आदि पर काम हुए हैं। गामीण इलाकों की स्थिति सुधारने की कोशिश की गई है। उदाहरण के लिए, वैक्सीनेशन के फोकस से यह दिखता है कि स्वास्थ्य जागरूकता एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों की पहुँच को बेहतर बनाने की पहलें हुई हैं। - भविष्य की मजबूती के लिए निवेश
क्षेत्र में उद्योग की अनुपस्थिति को लेकर उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है, और क्षेत्र में उद्योग, आर्थिक गतिविधियाँ क़ायम होने चाहिए ताकि रोजगार के अवसर बनें।
चुनौतियाँ एवं जनता की उम्मीदें
- चुनाव में जीत का अंतर धीरे-धीरे कम होना, मतलब मुकाबला अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। जनता विशेषकर स्वास्थ्य, रोजगार, और शिक्षा में वास्तविक सुधार की उम्मीद करती है।
- उद्योगों की कमी के कारण लोगों को अल्पकालीन रोज़गार या दूसरे जिलों को पलायन करना पड़ता है। सोहनलाल वाल्मीकि का दबाव यही है कि क्षेत्र में निवेश हो और स्वरोजगार बढ़े।
सोहनलाल वाल्मीकि की राजनीतिक यात्रा और उनकी जीतों से यह जाहिर होता है कि उन्होंने परासिया विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का भरोसा बनाए रखा है। जीत का अंतर अब इतना बड़ा नहीं रहा है, किन्तु जनता की उम्मीदें अभी भी ऊँची हैं। यदि साफ़ नीयत और निरंतर सामुदायिक जुड़ाव हो, तो आने वाले समय में विकास कार्यों की गिनती और उनकी प्रभावशीलता बढ़ सकती है।
