रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। बीते कुछ सालों में कई महिलाएं जीत के साथ विधानसभा और संसद तक पहुंच चुकी हैं और अपने काम से लोगों का दिल भी जीत ली हैं। मध्य प्रदेश की खंडवा विधानसभा सीट (क्रमांक 177) से चुनी गई भाजपा की विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तनवे जैसे कई नाम हैं, जिन्होंने समाज में नई पहचान बनाई है।
प्रारंभिक जीवन और पढ़ाई
श्रीमती कंचन मुकेश तनवे का जन्म 14 जून 1982 को पालसुदमाल में हुआ। उनके पिता का नाम नथु गारवे है। छोटी उम्र में ही उन्होंने बी.एस.सी. नर्सिंग का प्रथम साल तक पढ़ाई की, हालांकि ऊपर की पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। फिर भी, वह शुरू से ही समाजसेवा और जनता के साथ जुड़ने का शौक रखती थीं।
परिवार और निजी जिंदगी
उनका विवाह मुकेश तनवे से हुआ है। वे तीन बच्चों की मां हैं—एक बेटा और दो बेटियां। परिवार और राजनीति के बीच सही संतुलन बनाना उनके लिए आसान रहा है, और उन्होंने इसे बहुत ही सरलता से निभाया है।
मुख्य कार्य और समाज सेवा
राजनीति में आने से पहले, उनका मुख्य काम खेतीबाड़ी का था। किसान परिवार के बीच में रहकर, उन्होंने उनकी परेशानियों को समझा और हल निकालने की कोशिश की। समाज में रहते हुए, उन्होंने शिक्षा, महिलाओं की हालत मजबूत करने और गांवों के विकास के लिए भी काम किया।
राजनीतिक सफर की शुरुआत
उनका राजनीति में कदम वर्ष 2015 में पड़ा, जब वे जनपद अध्यक्ष बनीं। उसके बाद वह जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। इन वर्षों में, उन्होंने अपने इलाके में पकड़ मजबूत की और गांव-कस्बों में भी कामकाज का अच्छा नतीजा दिखाया। भाजपा के संगठन में भी वे जिला मंत्री के तौर पर सक्रिय रहीं।
विधायक के रूप में सफलता
2023 में विधानसभा चुनाव में, भाजपा ने उन्हें खंडवा सीट से उम्मीदवार बनाया। मुकाबला कठिन रहा, लेकिन संगठन और जनता का साथ मिलने से, उन्होंने जीत दर्ज की और पहली बार विधानसभा में पहुंचीं।
खंडवा की मुख्य समस्याओं में ये चीजें शामिल हैं—
- किसानों को सिंचाई के साधन देना
- युवाओं के लिए रोजगार का खाली मौका बनाना
- महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं।
कंचन तनवे ने इन मुद्दों पर विधानसभा में और अपने क्षेत्र में खूब काम किया है।
पद पर रहते हुए मुख्य कार्य
- ग्राम स्तर की महिलाओं के लिए स्वरोजगार की योजनाएं लाना।
- पंचायत में पारदर्शिता का ध्यान रखना।
- बच्चों की पढ़ाई और स्कूलों की हालत सुधारना।
- स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान चलाना।
- भाजपा की गतिविधियों में पूरी तरह से सक्रिय रहना।
मतदाताओं का समर्थन
–कुल प्राप्त वोट : 1,09,067
–वोट प्रतिशत : 59.19%
–जीत का अंतर : 38,049 वोट (कांग्रेस प्रत्याशी कुंदन मालवीय पर)
खंडवा में, कंचन तनवे को खासकर ग्रामीण लोग, महिलाओं के समूह और किसान परिवार पसंद करते हैं। उनकी सादगी और मिलनसार व्यवहार ने लोगों के दिल में जगह बनाई है। महिलाओं के बीच उनकी अच्छी छवि है, क्योंकि वह घरेलू महिलाओं और बेटियों की बातें उठाने में हमेशा लगी रहती हैं।
विवाद और चुनौतियाँ
हकीकत ये है कि राजनीति में विवाद होते ही रहते हैं. कंचन तनवे के राजनीतिक सफर में भी कानूनी या राजनीतिक विवाद आए हैं:
- पंचायत के दौरान कुछ लोगों ने उन पर फंड के इस्तेमाल में पक्षपात का आरोप लगाया, लेकिन इसको लेकर कोई ठोस सबूत नहीं मिले।
- विधानसभा के चुनाव में विपक्ष ने उन्हें अभावरहित कहकर ताने मारे।
- खंडवा इलाके में विकास की रफ्तार को लेकर लोगों ने कई बार नाराजगी जताई।
इसके बावजूद, उन्होंने आलोचनाओं और विरोध का सामना अपने धैर्य और अपनी टीम के साथ किया है। भविष्य की दिशा श्रीमती कंचन तनवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वे अपने क्षेत्र की उम्मीदों पर खरा उतरें।
खंडवा एक ऐसी जगह है जहां खेती-किसानी बहुत बड़ी बात है। सिंचाई, फसल बीमा और बाजार की कीमतें जैसे मसले यहाँ बहुत अहम हैं। अगर वे इनका समाधान निकालने में सफल होती हैं, तो उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ेगी। इसी के साथ, महिलाओं और युवाओं के लिए बनाई गई योजनाओं को जमीन पर उतारना भी उनके लिए ज़रूरी है।
श्रीमती कंचन मुकेश तनवे ने कम वक्त में ही अपनी एक अलग पहचान बना ली है। जिले से लेकर विधानसभा तक उनका सफर समाज सेवा और जनता के भरोसे का उदाहरण है। हालांकि, विवाद और चुनौतियों का सामना उन्होंने किया है, पर अगर वो काम को पारदर्शिता और विकास के साथ आगे बढ़ाएंगी, तो न सिर्फ खंडवा, बल्कि पूरे प्रदेश में उनका नाम और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
