रिपोर्ट, काजल जाटव: गौतम टेटवाल का जन्म 5 सितंबर 1963 को सारंगपुर, राजगढ़, मध्यप्रदेश में हुआ था। उनके पिता श्री भेवलाल टेटवाल एक सामान्य किसान परिवार से आते थे। गौतम टेटवाल ने अपनी पढ़ाई में भी खासा नाम कमाया। उन्होंने बी.एससी. (कृषि), एम.एससी. और एम.ए. (राजनीति शास्त्र) तक की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने समाज सेवा और राजनीति को ही अपना जीवन आधार बनाया।

शुरुआत का जीवन और संगठनात्मक जिम्मेदारी गौतम का राजनीतिक सफर बहुत ही कम उम्र में शुरू हो गया था। महज 14 साल की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। इसके बाद वे कई संगठनों से जुड़ते गए— 

  • 1983 में, सारंगपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर अध्यक्ष चुने गए। वे बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के तहसील संयोजक भी रहे।
  • 1993 से 1995 के बीच, वह बजरंग दल के राजगढ़ जिले के उपाध्यक्ष रहे।
  • 1995 से 1998 में, वह सरस्वती शिक्षा प्रतिष्ठान समिति के उपाध्यक्ष थे
  • 1998 से 2001 तक, सरस्वती शिशु मंदिर सारंगपुर के सचिव। 

इन सब जिम्मेदारीयों ने उन्हें जमीन से जुड़ा हुआ लोकप्रिय कार्यकर्ता और समाजसेवी के तौर पर पहचान दिलाई।

राजनीतिक करियर

राजनीति का सफर गौतम का सक्रिय राजनीति में कदम भारतीय जनता पार्टी से हुआ। वे भाजपा युवा मोर्चा के जिला और राज्य स्तर पर जिम्मेदारियां निभाते रहे। उनकी मेहनत और संगठनात्मक कौशल ने पार्टी का ध्यान खींचा।

  • 2008: पहली बार वे सारंगपुर से विधायक बनकर राजनीति में आए। 
  • 2013: उनके चुनावी समीकरण वैसे अच्छे नहीं रहे, और वह हार गए।
  • 2018: फिर से भाजपा के उम्मीदवार बनें, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 
  • 2023: उन्होंने फिर से सारंगपुर से विधायक चुने गए, और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में टेक्निकल एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार विभाग के मंत्री बने। 

चुनावी प्रदर्शन मौजूद आंकड़ों के मुताबिक: 

  • 2008 में वे एक मजबूत जीत के साथ पहली बार विधायक बने।
  • 2013 और 2018 में कांग्रेस के उम्मीदवारों ने उन्हें कड़ी टक्कर दी, और वे हार गए।
  • 2023 में वापसी हुई और उन्होंने भाजपा का खाता खोला। इस बार उनकी जीत में संगठन की मजबूत स्थितियों और मोदी लहर का असर भी दिखा।

कार्य और प्राथमिकताएँ 

गौतम टेटवाल की छवि एक कृषि विशेषज्ञ और समाजसेवी की है।

  • शिक्षा के क्षेत्र में संस्थानों के जरिए योगदान।
  • ग्रामीण विकास और युवाओं के कौशल विकास पर खास ध्यान।
  • सारंगपुर क्षेत्र में सड़क, बिजली और पानी की परेशानियों को हल करने का प्रयास।
  • पर्यावरण संरक्षण और साफ-सफाई पर भी उनका जोर रहा है। राज्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने खासतौर पर युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

विवाद और चुनौतियाँ

गौतम टेटवाल का नाम बहुत हद तक साफ-सुथरा रहा है, लेकिन कुछ बातों ने उनके नाम के साथ सवाल खड़े किए हैं:

  • 2013 और 2018 की जीत हार के बाद अक्सर ये आरोप लगाए गए कि वे जनता से अच्छे से संपर्क बनाए रखने में कमजोर साबित हुए।
  • विपक्ष भी अक्सर ये कहता रहा कि वे संगठन पर बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं और क्षेत्रीय मुद्दों को नजरअंदाज कर देते हैं।
  • हालाँकि, अभी तक उनके खिलाफ कोई बड़ा भ्रष्टाचार या घोटाले का केस नहीं दर्ज हुआ है।

गौतम टेटवाल की राजनीति का सफर संघ से भाजपा तक का बदलाव दिखाता है। उन्होंने समाजसेवा, शिक्षा और संगठन के जरिए अपनी पहचान बनाई और सारंगपुर के क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत की। 

हालांकि कुछ वक्त हार का सामना भी करना पड़ा, मगर 2023 में मिली जीत ये दिखाती है कि वे अभी भी जनता के दिलों में पसंद किए जाते हैं और उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है। अब एक मंत्री के तौर पर उनके लिए ये चुनौती है कि वे अपने क्षेत्र और पूरे मध्यप्रदेश में विकास और रोजगार के कामों को जमीन पर उतारें।

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