रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधनी विधानसभा सीट का महत्व हमेशा ही खास रहा है। यह सीट काफी समय से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मजबूत गढ़ रही है। 2023 के विधानसभा चुनावों में भी शिवराज ने यहां से भारी मतों से जीत दर्ज की थी। लेकिन जब वे 2024 में विदिशा से सांसद बने और सक्रिय राजनीति से दूर हो गए, तो यह सीट खाली रह गई। इसी बीच नवंबर 2024 में होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा ने अनुभवी नेता रमाकांत भार्गव को उम्मीदवार बनाया।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

रमाकांत भार्गव का जन्म 2 अक्टूबर 1953 को ग्राम जैत, सीहोर जिले में हुआ था। वह मूल रूप से किसान परिवार से हैं, और अपनी पढ़ाई शाहगंज से हायर सेकेंडरी तक की। खेत-किसानी ही उनके जीवन का मुख्य हिस्सा रही, और इसी क्षेत्र में वह लंबे समय तक सक्रिय रहे, खासकर सहकारी संस्थानों में।

  • 2003 से 2011 तक वह जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, सीहोर के प्रमुख रहे।
  • 2007 से 2018 तक उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) में निदेशक और अध्यक्ष के तौर पर काम किया।
  • इसी दौरान, वह इफको, नई दिल्ली के निदेशक भी बने।

उनकी सहकारी सेवाएं किसानों के साथ उनके गहरे जुड़ाव की वजह बनीं, और भाजपा ने उन्हें राजनीति में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपीं।

लोकसभा से विधानसभा तक का सफर

2019 में भाजपा ने रमाकांत भार्गव को विदिशा लोकसभा सीट से मैदान में उतारा। यह सीट हमेशा से ही भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। उन्होंने यहां भारी मतों से जीत हासिल कर संसद पहुंच गए। संसद में उन्होंने कृषि, रसायन और उर्वरक विभाग की स्थायी समिति में सक्रिय भागीदारी निभाई।

लेकिन 2024 के चुनावों में माहौल बदल गया। शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा छोड़कर विदिशा लोकसभा से चुनाव लड़ा और जीत गए। इससे रमाकांत को सांसद पद से इस्तीफा देना पड़ा। वहीं, भाजपा ने तुरंत ही उन्हें बुधनी उपचुनाव का उम्मीदवार बना दिया।

उपचुनाव का घटनाक्रम और मत परिणाम

बुधनी उपचुनाव की खबर जैसे ही फैली, राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। अक्टूबर 2024 में भाजपा ने आधिकारिक तौर पर भार्गव का नाम तय कर दिया। मजेदार बात ये रही कि नामांकन से पहले ही सोशल मीडिया पर उनके प्रचार पोस्टर वायरल हो गए, जिससे यह चर्चा का विषय बन गया कि पार्टी के अंदर ही पहले ही नाम तय हो चुका था।

13 नवंबर 2024 को मतदान हुआ, और 23 नवंबर को नतीजे आए। भार्गव ने कांग्रेस के राजकुमार पटेल को 13,901 वोटों के अंतर से हरा दिया। यह जीत भाजपा के लिए राहत की बात थी, लेकिन वोटों का अंतर पहले से काफी कम था।

2023 में हुए विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने इसी सीट से 1,04,974 वोटों का बड़ा फासला बनाते हुए जीत हासिल की थी। इसके मुकाबले, रमाकांत भार्गव की जीत का फासला अभी करीब 90,000 वोट कम रह गया है। यह गिरावट भाजपा के लिए चिंता का संकेत देती है।

विवाद और चुनौतियां

  • उम्मीदवारी से पहले प्रचार: जब उनके नामांकन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी, उसी वक्त उनके पोस्टर और प्रचार वैन आसपास दिखाई देने लगे। इससे पार्टी की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर बातें होने लगीं।
  • बीजेपी में अंदरूनी खींचतान: यहां के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी गई। कुछ नेताओं ने साफ कहा कि अगर उम्मीदवार नहीं बदला गया, तो वे कांग्रेस का समर्थन करेंगे। यह गुटबाजी पार्टी के लिए परेशानी बन गई।
  • वोटें कम होने का रुख: कांग्रेस ने इस बार जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दों पर वोट जुटाने की कोशिश की। इसकी वजह से भाजपा की जीत का अंतर ऐतिहासिक स्तर पर घट गया। इससे पता चलता है कि शिवराज के बिना बुधनी में भाजपा की पकड़ कमजोर हो गई है।

उनके कार्य और प्राथमिकताएँ

रमाकांत भार्गव हमेशा से किसानों और सहकारी संस्थाओं के समर्थन में खड़े रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में सामूहिक विवाह कार्यक्रम, पेड़ लगाना, और नर्मदा नदी की रक्षा जैसे प्रयासों में भाग लिया। सांसद रहते हुए भी वे किसानों को उर्वरक, खेती योजनाओं और जानकारी देने में सक्रिय रहे।

रमाकांत भार्गव की जीत भाजपा के लिए अहम है, क्योंकि बुधनी क्षेत्र शिवराज सिंह चौहान का घर माना जाता है। हालांकि, भार्गव ने उपचुनाव में कांग्रेस को हरा, पार्टी की मजबूत स्थिति बचाई, लेकिन कम होती जीत का अंतर, अंदरूनी मतभेद और कमजोर जनता से जुड़ाव उनके सामने बड़ी चुनौतियाँ हैं।

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