रिपोर्ट, काजल जाटव: श्रीमती कृष्णा गौर, भारतीय जनता पार्टी की एक वरिष्‍ठ और प्रभावशाली नेता हैं, जिनकी जिंदगी में जनता की सेवा के लिए उनका गहरा झुकाव दिखता है । इंदौर में 26 सितंबर, 1968 को जन्‍मी, श्रीमती गौर ने विज्ञान और भूगोल जैसे विषयों में अपनी पढ़ाई पूरी की, जिससे उनके व्यक्तित्व में व्यावहारिकता और दूरदर्शिता दोनों का मेल नजर आता है। उन्होंने विज्ञान में स्नातक और भूगोल में एम.ए. की डिग्री हासिल की है। उनका जन्म किसी राजनीतिक परिवार में नहीं हुआ, मगर उनके मेहनत, लगन और समाज सेवा के प्रति उनके जज़्बे ने उन्हें राजनीति में एक अलग ही पहचान दिलाई है।

उनके पिता, स्वर्गीय श्री नारायण सिंह यादव, और पति, स्वर्गीय श्री पुरुषोत्तम गौर, ने उनके जीवन को बहुत प्रभावित किया। उनका शादी श्री पुरुषोत्तम गौर से हुई, और उनके दो बेटे हैं। परिवार की जिम्मेदारी और सामाजिक सेवा में उनका रुझान दोनों साथ चलते रहे। उनकी दिलचस्पी समाज से जुड़ी चीजों और राजनीति में रही है, और उन्होंने अपनी शुरुआत भी इन ही क्षेत्रों से की।

सार्वजनिक जीवन और राजनीति का सफर

श्रीमती कृष्णा गौर ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कॉलेज में छात्र प्रतिनिधि के तौर पर की, जहां उन्होंने अपने साथियों की बात पहुंचाई। इस शुरुआती एक्सपीरियंस ने उन्हें नेतृत्व के गुण और जनता से जुड़ने का तरीका समझाने में मदद की। बाद में, उन्होंने लायंस क्लब सेंचुरी में कोषाध्यक्ष का पद भी संभाला, जिससे उनके सामाजिक कामों में सक्रिय योगदान साफ झलकता है।

2003 में, वे भारतीय जनता पार्टी की सदस्य बनीं, जिससे उनके राजनीतिक सफर का असल आगाज हुआ। पार्टी ने उनकी संगठन क्षमता और समर्पण को पहचानते हुए, 2005 में उन्हें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया। हालांकि, जल्द ही उन्होंने खुद ही इस पद से इस्तीफा दे दिया। ये फैसला उनके साफ-सुथरे विचारों और पद के बजाय जनता की सेवा को प्राथमिकता देने की सोच का प्रतीक है।

2009 में, कृष्णा गौर ने भोपाल नगर निगम की मेयर बनकर अपने अहम कदम उठाए। उनका समय मेयर के तौर पर काफी सफल रहा, और उन्हें कई पुरस्कार भी मिले। उन्होंने भोपाल के विकास के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया और उनमें सफलता हासिल की। उनका कार्यकाल जब चला, तब वे यूरोप, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और बैंकॉक की यात्राएं भी कर आए, जहां से उन्हें दूसरे शहरों के विकास मॉडल को समझने का मौका मिला और फिर उन्हें भोपाल में लागू किया।

इसके साथ ही, वह यादव समाज की प्रदेश उपाध्यक्ष और अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की सदस्य भी रहीं। इन पदों पर रहकर उन्होंने पिछड़े वर्ग और यादव समुदाय के हित में बहुत काम किया। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी काबिलियत को माना गया, जैसे कि भाजपा के अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चा की उपाध्यक्ष बनने और बिहार का प्रभार संभालने जैसी जिम्मेदारियां भी मिलीं।

विधायक के रूप में उनकी उपलब्धियां और चुनावी नतीजे

श्रीमती कृष्णा गौर ने पहली बार 2018 में 15वीं विधानसभा का हिस्सा बनीं, जब उन्हें गोविंदपुरा (154) सीट से चुना गया था। ये उनके राजनीतिक सफर की एक बड़ी मंजिल थी। 2023 में, उन्हें फिर से विधानसभा का सदस्य चुना गया, जो यह दर्शाता है कि उनके इलाके के लोग उनके प्रति कितने भरोसेमंद हैं।

2023 के चुनाव में, कृष्णा गौर ने अपने मुकाबले वाले उम्मीदवार को भारी वोटों के अंतर से हराया। उन्होंने कांग्रेस के रविंद्र साहू को 1,06,903 वोटों से परास्त किया। यह जीत न सिर्फ उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि गोविंदपुरा वाले उनके नेतृत्व और काम से कितना खुश हैं।

विवाद और उनका असर

श्रीमती कृष्णा गौर का राजनीति जीवन कुछ विवादों से भी दो-चार हुआ है, हालांकि इन विवादों ने उनके मजबूत करियर पर ज्यादा असर नहीं डाला। उनका नाम कुछ जमीन से जुड़ी जिंदगियों और परियोजनाओं के सही तरीके से लागू न होने के आरोपों से जुड़ा है। एक मामला उनके महापौर कार्यकाल के दौरान जमीन का आवंटन का था, जिस पर विपक्षियों ने सवाल उठाए। पर इन आरोपों पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए वे अपने राजनीतिक सफर पर कायम रहीं।

साथ ही, उन्हें राजनीति में अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का सामना करना पड़ा। एक अहम पद पर होने के नाते, उनके फैसलों की हर बार आलोचना हुई, पर उन्होंने अपनी जज्बा और जनता का समर्थन लेकर इन हर चुनौतियों का सामना कर लिया।

आज का वक्त और भविष्य

आज, श्रीमती कृष्णा गौर मध्यप्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और घुमंतू-अर्धघुमंतू कल्याण जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनका सफर वैसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने अपनी मेहनत, लगन और जनता के प्यार से राजनीति में नाम बनाया। उनका इरादा है कि वे आगे भी मध्य प्रदेश की तरक्की और समाजी सुधार में अपना योगदान देते रहें।

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