Sonam Wangchuk explains why he will not participate in the Delhi protest.

अरूणिमा सिंह, भोपाल : नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का बयान सामने आया है। उन्होंने प्रदर्शन का समर्थन करते हुए इसमें शामिल होने को लेकर अनिश्चितता जताई। अपने संदेश में उन्होंने मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म ‘मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग’ की पंक्ति का इस्तेमाल करते हुए बताया कि राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से निपटना भी जरूरी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि देश के युवाओं को रोकना आसान नहीं है और समस्याओं का समाधान संवाद से निकलना चाहिए।कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने विभिन्न छात्र संगठनों, किसान संगठनों और अन्य समूहों के साथ मिलकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

फ़ैज़ की नज़्म का सहारा लेकर सोनम वांगचुक ने क्या कहा?

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में बताया कि कई लोग उनसे पूछ रहे हैं कि वह दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल क्यों नहीं हो रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की एकजुटता की सराहना की, लेकिन कहा कि देश के सामने राजनीतिक चुनौतियों के अलावा प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े गंभीर खतरे भी हैं।अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की मशहूर नज़्म ‘मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग’ की पंक्ति का उल्लेख किया। यह नज़्म मूल रूप से प्रेम के अनुभव से आगे बढ़कर दुनिया के दुखों और सामाजिक वास्तविकताओं की ओर ध्यान दिलाती है।वांगचुक ने इसी भाव के जरिए कहा कि राजनीतिक समस्याओं के समाधान के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और उनके प्रभावों को कम करने पर भी ध्यान देना जरूरी है।

‘जब चूल्हा जलने लगता है तो खाना पकने लगता है’

वांगचुक ने अपने संदेश में चूल्हा जलाने और माचिस की तीली का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में चूल्हा जलाने के लिए माचिस की जरूरत होती है, लेकिन जब चूल्हा जलने लगता है तो खाना पकने की प्रक्रिया आगे बढ़ती रहती है।इस उदाहरण के जरिए उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदर्शन में शामिल लोग राजनीतिक मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखेंगे, जबकि वह प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े खतरों पर काम करने पर ध्यान देंगे।उन्होंने नेपाल में आई आपदा और सिक्किम में लोनाक झील से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए भी गंभीर प्रयास जरूरी हैं।वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों और युवाओं से एकजुट रहने तथा शांति का रास्ता नहीं छोड़ने की अपील की। उन्होंने महात्मा गांधी का संदर्भ देते हुए कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करना महत्वपूर्ण है।

चिराग पासवान ने युवाओं को लेकर क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान ने प्रदर्शन से पहले कहा कि देश के युवाओं को रोकना आसान नहीं है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया।पासवान ने संकेत दिया कि राजनीतिक मतभेदों और शिकायतों का समाधान बातचीत के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उनके बयान ऐसे समय में सामने आए, जब प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की आवाजाही पर संभावित पाबंदियों की चर्चा हो रही थी।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों?

प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों का आरोप है कि चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। आयोजकों ने दावा किया है कि यह संख्या 13 करोड़ से अधिक है। वे इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।हालांकि, 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा आयोजकों का दावा है। इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित स्पष्टीकरण की जांच जरूरी है।

एसआईआर को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। आयोजकों ने दावा किया है कि यह संख्या 13 करोड़ से अधिक है। वे इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।हालांकि, 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा आयोजकों के दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में चुनाव आयोग का पक्ष और संबंधित आधिकारिक आंकड़े महत्वपूर्ण हैं।

प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबरें सामने आईं। दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। वहीं, रेल सेवाओं, मेट्रो स्टेशनों और इंटरनेट पर पाबंदियों से संबंधित दावे भी सामने आए।इन पाबंदियों की सटीक संख्या और उनके दायरे को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर हो सकता है। इसलिए ट्रेनों को रद्द करने, मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट सेवाएं रोकने से संबंधित आंकड़ों को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर सोनम वांगचुक ने राजनीतिक संघर्ष के साथ प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की जरूरत पर ध्यान दिलाया है। चिराग पासवान ने भी इस बीच संवाद को समाधान का रास्ता बताया है।

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