Satya Niketan PG Tragedy: Illegal Extra Floors on Old Building Raise Serious Questions After Seven Deaths.

Muskan Garg: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक PG हॉस्टल की इमारत अचानक ढहने से सात लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद जहां राहत और बचाव अभियान चलाया गया, वहीं अब इस घटना ने इमारत की सुरक्षा, निर्माण नियमों और कथित लापरवाही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में दर्ज FIR के अनुसार, करीब 50 साल पुरानी इस इमारत की नींव अतिरिक्त भार सहने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं थी। इसके बावजूद इमारत के ऊपर चार अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किए जाने का आरोप है। FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिक मंजिलों के जरिए किराये से ज्यादा कमाई करने के उद्देश्य से यह निर्माण कराया गया।

50 साल पुरानी इमारत बनी थी PG हॉस्टल:

जिस इमारत में हादसा हुआ, वह करीब पांच दशक पुरानी बताई जा रही है। बाद में इसकी मरम्मत कर इसे ‘HostelDaze’ PG के रूप में संचालित किया जाने लगा। सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास का प्रमुख छात्र इलाका है, जहां बड़ी संख्या में छात्र PG और किराये के कमरों में रहते हैं।
पुलिस की FIR के मुताबिक, इमारत के मालिक हरिराम बंसल उर्फ गुप्ता और उनके भाई ने पुरानी संरचना के ऊपर चार अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कराया। आरोप है कि मालिकों को इमारत की पुरानी नींव की क्षमता के बारे में जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद अतिरिक्त निर्माण कराया गया।

अतिरिक्त निर्माण से बढ़ा इमारत पर भार:

FIR में दावा किया गया है कि अतिरिक्त मंजिलों और अन्य निर्माण कार्यों के कारण इमारत की संरचनात्मक मजबूती पर दबाव बढ़ गया था। पुरानी नींव पर अतिरिक्त भार पड़ने से इमारत की भार सहने की क्षमता प्रभावित होने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि, पुलिस की जांच अभी जारी है और इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

बेसमेंट में चल रहा था निर्माण कार्य:

हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान बारिश के कारण बेसमेंट में पानी भी भर गया था। इसके बाद इमारत अचानक ढह गई और कई लोग मलबे के नीचे दब गए।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। रविवार से सोमवार शाम तक चले बचाव अभियान में कम से कम 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। इनमें से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत:

हादसे में जान गंवाने वालों में पांच छात्र शामिल हैं। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
अभिषेक – 20 वर्ष
युवराज सोनी – 20 वर्ष
पवन – 17 वर्ष
अर्पित जजाज – 19 वर्ष
अक्षत सिंह यादव – 18 वर्ष
इसके अलावा 75 वर्षीय मजदूर सुरिंदर सिंह की भी हादसे में मौत हुई। सातवें मृतक की पहचान अभी नहीं हो पाई है।
छात्रों की मौत ने इस घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। सत्य निकेतन जैसे छात्र इलाकों में बड़ी संख्या में युवा PG और हॉस्टल में रहते हैं, ऐसे में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

पांच घायलों का अस्पताल में इलाज जारी:

हादसे में घायल पांच लोगों का इलाज AIIMS ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। घायलों की पहचान असगर अली (30), नीरज बावन (19), आदित्य कुमार (19), नितिन छिब (19) और मोहम्मद अयान (18) के रूप में हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से तीन घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

FIR दर्ज, BNS की धाराओं में मामला:

साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में रविवार रात FIR नंबर 153/2026 दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 290 और 125(a) के तहत मामला दर्ज किया है।
इन धाराओं में गैर-इरादतन हत्या के बराबर न आने वाला आपराधिक मानव वध, इमारत के निर्माण, मरम्मत या उसे गिराने में लापरवाही तथा किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़े अपराध शामिल हैं।

मालिक समेत तीन लोग गिरफ्तार:

दिल्ली पुलिस ने 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी और बेटे को मामले में गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, गुप्ता भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट रह चुके हैं।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इमारत में अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कब और किस अनुमति के तहत किया गया था। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि निर्माण से पहले इमारत की संरचनात्मक क्षमता की जांच हुई थी या नहीं और क्या जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

हादसे के बाद उठे कई बड़े सवाल:

सत्य निकेतन की इस घटना ने पुरानी इमारतों में होने वाले अतिरिक्त निर्माण और PG संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर इमारत की नींव अतिरिक्त भार सहने में सक्षम नहीं थी, तो उसके ऊपर चार अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कैसे हुआ? क्या निर्माण से पहले इमारत की संरचनात्मक जांच की गई थी? क्या इसके लिए जरूरी अनुमति ली गई थी? और अगर इमारत की स्थिति कमजोर थी, तो उसमें छात्रों और अन्य लोगों को रहने की अनुमति कैसे मिली?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।

किराये की कमाई से पहले जरूरी है लोगों की सुरक्षा:

PG और किराये की इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। पुरानी इमारत में अतिरिक्त निर्माण करने से पहले उसकी नींव और पूरी संरचना की क्षमता की जांच करना जरूरी होता है।
सत्य निकेतन का यह हादसा इस बात की याद दिलाता है कि किसी भी इमारत का विस्तार या उससे होने वाली आर्थिक कमाई लोगों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकती। अगर जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह घटना निर्माण नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों में लापरवाही के गंभीर परिणामों का उदाहरण बन सकती है।
सभी तथ्यों और नामों में एकरूपता लाएँ
रिपोर्ट को अधिक वस्तुनिष्ठ भाषा में लिखें
लंबी भूमिका को संक्षिप्त और प्रभावी करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *