Toshi Gupta: उत्तराखंड में बसा ऋषिकेश ना केवल सुंदरता के लिए बल्कि योग के लिए भी प्रसिद्ध हैं। गंगा के तट पर बसा ये शहर पुरी दुनिया में योग की नगरी से जाना जाता हैं। आज के समय में ऋषिकेश योग और मेडिटशन की अंतरराष्ट्रीय राजधानी बन चुका हैं। लेकिन क्या आपको जानते हैं कि , ऋषिकेश को ही योग नगरी क्यों कहां जाता हैं? आखिर ऐसा क्या खास हैं इस शहर में की इसका योग पुरी दुनिया में मशहूर हैं। चलिए जानते हैं-
क्यों कहां जाता हैं ऋषिकेश को योग नगरी ?
ऋषिकेश को भारत में ही नहीं बल्कि पुरी दुनिया में योग की नगरी कहा जाता हैं। मान्यताओं के अनुसार यहां देश- विदेश के लोग योग सीखने आते हैं। महर्षि महेश योगी पहले ऐसे व्यक्ति थे जो ऋषिकेश में योग और मेडिटेशन करने आए थे। जिसके बाद उन्होंने साल 1961 में चौरासी कुटिआ का निर्माण किया था। ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन और योग सीखने के लिए इस चौरासी कुटिआ को बनाया गया था। इसलिए तभी से ऋषिकेश को योग की नगरी कहां जाता हैं।
महर्षि महेश योगी कौन थे ?
महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1918 को हुआ था। महर्षि छत्तीसगढ़ के पांडुका गांव के रहने वाले थें। महेश योगी अपने गुरु, स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती से योग और मेडिटेशन सीखते थे। इतना ही नहीं बल्कि, महर्षि महेश योगी ने इलाहाबाद से (M.A. in Philosophy) की पढ़ाई भी करी थी। साथ ही, साल 1955 में महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय का निर्माण किया गया था।
क्या हैं बीटल्स आश्रम ?
ऋषिकेश में स्थित चौरासी कुटिआ को ही बीटल्स आश्रम कहां जाता हैं। ऐसा माना जाता हैं कि, साल 1968 में रॉक बैंड द बीटल्स के लोग ऋषिकेश आए थे। वह महर्षि महेश योगी से ट्रान्सेंडैंटल ध्यान सीखने आए थे। ट्रान्सेंडैंटल ध्यान सीखने के साथ- साथ उन लोगों ने 48 गाने लिख भी लिख डाले। इतना ही नहीं बल्कि जॉन लेनन ने तो ‘द हैप्पी ऋषिकेश सॉन्ग’ नाम का गाना रिकॉर्ड भी किया था। बस तभी से चौरासी कुटिआ को बीटल्स आश्रम भी कहां जाता हैं।
