ऋषिता गंगराड़े : भारत जैसे देश में, जहां आस्था रग-रग में बसी है, वहां भगवान और बाबाओं को लेकर लोगों की श्रद्धा कोई नई बात नहीं। लेकिन अब समय बदल रहा है, और साथ ही बदल रहा है बाबाओं का रूप। जी हां, अब गांव-कस्बों में सोशल मीडिया पर एक नया चलन दिख रहा है — वर्चुअल बाबा, यानी ऐसा संत जो ना कभी आपके गांव आया, ना किसी आश्रम में बैठा — पर मोबाइल स्क्रीन पर आपको आशीर्वाद देता है, मंत्र सुनाता है और बदले में QR कोड भेज कर दान भी मांगता है।

ये बाबा कोई असली इंसान नहीं होते। ये AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाए गए चेहरे और आवाज़ें होती हैं। मतलब, कंप्यूटर जनरेटेड चेहरा, एकदम असली जैसा दिखता है — माथे पर तिलक, गेरुए कपड़े, गूंजती हुई गहरी आवाज़ — और वो कहता है कि “मैं तुम्हारे दुःख दूर कर सकता हूँ, बस मेरा बताया हुआ मंत्र बोलो और 501 रुपये का दान दो।”सोचिए, एक बुजुर्ग दादी या कोई अकेली माँ, जिनका सहारा सिर्फ आस्था है — वो इस वीडियो को देखकर क्या करेंगी? एक सच्ची घटना जो सोचने पर मजबूर कर देमध्यप्रदेश के एक छोटे कस्बे में रहने वाली 58 साल की मीनाक्षी देवी (बदला हुआ नाम) को व्हाट्सएप पर एक वीडियो मिला। वीडियो में एक वर्चुअल बाबा कह रहा था —माता रानी की कृपा चाहिए तो इस मंत्र को तीन बार बोलो और 501 रुपये दान करो।

मीनाक्षी जी ने सोचा, शायद मेरी तकलीफें कम हो जाएँ। उन्होंने वीडियो में दिखाए QR कोड पर पैसे भेज दिए। कुछ दिन बाद फिर एक वीडियो आया — इस बार दान की राशि 1100 रुपये थी। और फिर से उन्होंने पैसे भेज दिए।जब उनके बेटे को इस बारे में पता चला, तब जाकर सच्चाई सामने आई — ये बाबा असली नहीं था। न ही वो कोई संत था, न कोई आध्यात्मिक गुरु — ये एक AI से बना नकली चेहरा था, जिसे किसी स्क्रिप्ट के हिसाब से चलाया जा रहा था। और इसके पीछे बैठे थे कुछ ठग — जो लोगों की आस्था को अपने फायदे का ज़रिया बना रहे थे।

ये वर्चुअल बाबा आखिर हैं कौन?

क्यों बन रहे हैं लोग शिकार?

इसका एक सीधा कारण है — डिजिटल जागरूकता की कमी। छोटे शहरों और गाँवों में इंटरनेट तो पहुँच गया, पर उससे जुड़ी समझदारी अभी उतनी नहीं आई है। लोग वीडियो में जो देखते हैं, उसे सच मान लेते हैं। और जब वो बाबा लाइव आकर बात करता है या सवालों का जवाब देता है, तो उन्हें लगता है कि वो सच में कोई सिद्ध पुरुष है।

और फिर, जब कोई मन की बात जान जाए — जैसे आपके जीवन में पैसे की परेशानी है या शादी में रुकावट है, तो हम मान ही लेते हैं कि उसे कुछ तो दिव्य ज्ञान होगा।

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

AI और साइबर सुरक्षा के जानकार साफ कहते हैं — ये कोई मज़ाक नहीं है। ये एक नया और बेहद खतरनाक तरीका है ठगी का, जो लोगों की भावनाओं और आस्था का इस्तेमाल करता है। कल को अगर कोई ऐसे बाबा की बातों में आकर ज़िंदगी का बड़ा फैसला ले ले, तो सोचिए उसका क्या असर हो सकता है?

हमें क्या करना चाहिए?

कोई भी बाबा या गुरु अगर पैसे मांगे, तो सतर्क हो जाइए।

वीडियो या कॉल असली है या नहीं, इसे पहचानना सीखें।

QR कोड पर पैसे भेजने से पहले किसी अपने से, या पुलिस से सलाह लें।

अगर धोखा हो चुका है, तो साइबर क्राइम वेबसाइट [cybercrime.gov.in (https://www.cybercrime.gov.in/) पर शिकायत करें।

अंत में…

हमेशा याद रखें आस्था आँख बंद कर के नहीं, समझदारी से होनी चाहिए।*वो बाबा जो आपके फोन में आ रहा है, उसका चेहरा चाहे कितना भी पवित्र लगे, उसकी आवाज़ चाहे कितनी भी मधुर हो पर अगर वो आपसे पैसे माँग रहा है, तो रुकिए, सोचिए, और फिर फैसला लीजिए।

हमारे बुज़ुर्ग, हमारे परिवार के लोग, जिन्होंने टेक्नोलॉजी को कभी इस्तेमाल नहीं किया, वो इन चीज़ों के आसान शिकार बन सकते हैं। उन्हें समझाइए, उनका साथ दीजिए।

अगर आपने भी कभी ऐसे किसी वर्चुअल बाबा का वीडियो देखा है, या किसी करीबी को इससे नुक़सान हुआ है तो हमें ज़रूर लिखीये agnipatrika@gmail.com। आपकी कहानी किसी और को जागरूक कर सकती है।

आस्था ज़रूरी है, लेकिन आँखें खुली रखना उससे भी ज़्यादा।

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