रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्यप्रदेश की राजनीति में मंदसौर सीट ने बहुत से नेताओं को मौका दिया है। इनमे से एक हैं श्री विपिन जैन. उन्होंने शुरुआत अपने इलाके की समस्याएं देखकर की और आज वह प्रदेश कांग्रेस में एक मजबूत आवाज हैं। 2023 में पहली बार विधायक बनने वाले विपिन जैन का सफर दिखाता है कि जनता के बीच रहना और सेवा करना ही असली राजनीति है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

8 जुलाई 1975 को चितौड़गढ़ (राजस्थान) में जन्मे विपिन जैन का बचपन सरलता और संघर्ष में बीता। उनके पिता श्री सुभाषचंद्र जैन एक समाजसेवी और व्यापारी थे, जिन्होंने उन्हें मेहनत और ईमानदारी का ज्ञान दिया।

व उन्होंने हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने व्यापार को अपना काम बनाया। लेकिन उनका दिल समाज सेवा और लोगों की मदद करना चाहता था। यही वजह थी कि वह राजनीति में आए।

राजनीति में कदम और शुरुआत

विपिन जैन ने अपनी राजनीति की शुरुआत अपने ही इलाके से की।

  • 2006 में वे जनपद पंचायत मंदसौर के सदस्य बने। यह उनका पहला बड़ा कदम था। उस वक्त उन्होंने गांवों की सड़क, पानी और विकास जैसे मुद्दे उठाए।
  • फिर 2015 में वह ग्राम पंचायत दलौदा चौपाटी के सरपंच चुने गए। लोगों के साथ उन्होंने साफ और मेहनती काम किया।
  • दलौदा में आज भी लोग उनके काम को याद करते हैं।

उनकी मेहनत और सादगी ने कांग्रेस का ध्यान खींचा। 2023 में उन्हें मंदसौर जिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सबको साथ लेकर चलना सीखा। लोगों में एकता बढ़ाई। पार्टी की बातें गांव-गांव तक पहुंचाई।

2023 का विधानसभा चुनाव और जीत

विपिन जैन ने मंदसौर सीट से पहली बार चुनाव लड़ा

भाजपा का मजबूत संगठन और पैसे के बावजूद, वह लोगों से मिलकर प्रचार किया। उन्होंने किसानों, व्यापारियों, युवा और महिलाओं पर ध्यान दिया।

मंदसौर वो जगह है जहां किसान और अफीम किसानों के मुद्दे गर्म रहते हैं। वहां विपिन जैन ने किसानों का साथ दिया। उन्होंने कहा, “कृषि का सम्मान और युवाओं को मौके”।

उनसे लोगों को बहुत प्यार मिला। उनके सीधे बोलने और स्वभाव की वजह से, वह करीब 12,000 वोटों से जीते। उनकी जीत दिखाती है कि लोग अपने लिए काम करने वाले नेताओं को अभी भी चाहेंगे।

विधायक के रूप में काम और मुख्य बातें

विपिन जैन ने जब विधानसभा में कदम रखा, तो उसने मंदसौर के कई पुराने मुद्दों पर ध्यान दिया।

  • उन्होंने किसानों की पानी की व्यवस्था और मुआवजा योजनाओं के बारे में सरकार को दबाव बनाया।
  • अफीम नीति में सुधार, किसानों के ऋण का पुनर्गठन, और छोटे उद्योगों को मदद देने के लिए वे कई बार विधानसभा में बोले।
  • उन्होंने पानी, पढ़ाई और इलाज जैसे मामलों में गांवों में डॉक्टर की जरूरत और स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती का कहा।

मंदसौर के युवाओं के लिए उन्होंने रोजगार केंद्र शुरू करने की बातें की ताकि लोग शहर छोड़ ना जाएं।

उनके काम करने का तरीका साफ और लोगों से सीधे बात करना है — वह हर हफ्ते अपने क्षेत्र के कार्यालय में जनता का सामना करते हैं, जहां लोग अपनी बातें आसानी से कह सकते हैं।

वोट बैंक और संगठन

विपिन जैन की राजनीति जात-पांत के झगड़ों से ऊपर जाकर सीधे बात करने पर है।

मंदसौर में जैन समाज, ओबीसी और खेती करने वालों में उनको अच्छी पहचान है।

कांग्रेस में वे युवा नेताओं की नई पीढ़ी के नेता हैं — जो बेहतरी से सोचते हैं और आधुनिक भी हैं।

उनकी लोकप्रियता सिर्फ उनके काम के कारण नहीं बल्कि उनकी आसानी से मिल जाने से भी है। वह घर, बाजार और खेतों में आते हैं, इसलिए लोग मानते हैं कि “विपिन जी सुनते हैं और कुछ करते भी हैं।”

विवाद और आलोचना

हालांकि विपिन जैन की छवि अच्छा और समाज के काम करने वाला है, मगर राजनीति में हर किसी के साथ परेशानी आती है।

2023 के चुनाव में उन पर बहुत धन खर्च करने और झूठ बोलने का आरोप लगा था, जिसे उन्होंने खारिज किया।

विपक्ष ने कहा कि उन्हें जल्दी पद मिलने का कारण राजनीति के खेल हैं, लेकिन उनके समर्थक कहते हैं कि यह सब उनके काम और लोगों से जुड़ाव का नतीजा है।

एक बार इतना भी हुआ कि उन्होंने विधानसभा में मंदसौर के अफीम किसानों के बारे में बात की। भाजपा ने इसे राजनीति बता दिया, लेकिन लोग इसे किसानों की असली बात मान रहे थे।

व्यक्तित्व और छवि

विपिन जैन को सरल, मिलनसार और विनम्र माना जाता है। वह खुद को ‘‘जनता का बंदा’’ कहते हैं, नेता नहीं। उनका तरीका सीधा है — न मंच पर दूर से, न बहुत औपचारिक। राजनीति के अलावा, वह समाज की मदद भी करते हैं। मंदसौर और दलौदा में उन्होंने स्कूल, गरीब मरीज और साफ-सफाई में मदद की है।

विपिन जैन की राजनीति असली मुद्दों पर केंद्रित है। उन्होंने पंचायत से लेकर विधानसभा तक यह दिखाया कि संघर्ष और मदद से ही आप ऊपर पहुंचते हैं। उनका सफर उन युवाओं के लिए अच्छा उदाहरण है जो राजनीति को समाज बदलने का काम मानते हैं।

मंदसौर के लोग उनके लिए एक सरल, सक्रिय और दिलदार नेता बन गए हैं, और आने वाले वक्त में उनका असर पूरे प्रदेश में हो सकता है।

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