Muskan Garg: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जिसे “नवाबों का शहर” और “शिराज-ए-हिंद” भी कहा जाता है, ने एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। 43वें जनरल कॉन्फ्रेंस में यूनेस्को ने लखनऊ को ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी‘ (Creative City of Gastronomy) का सम्मान प्रदान किया है। लखनऊ हैदराबाद के बाद यह मान्यता प्राप्त करने वाला भारत का दूसरा शहर बन गया है।
यूनेस्को द्वारा दी गई मान्यता और इसका महत्व:
2004 में यूनेस्को का ‘क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क’ (UCCN) बनाया गया था, जिसने रचनात्मकता को शहरी विकास के लिए एक मुख्य कारक के रूप में रखा था। लखनऊ को “गैस्ट्रोनॉमी” श्रेणी में शामिल करना, शहर की गहरी पाक-संस्कृति, रसोइयों के जीवंत समुदाय और स्वदेशी सामग्री का उपयोग करने की परंपरा को दर्शाता है।
पर्यटन में बढ़ौती:
शहर की पहचान गलौटी कबाब, लज़ीज़ बिरयानी, कोरमा, शीरमाल, शाही टुकड़ा और मुंह में घुल जाने वाले गलौटी कबाब और “दम पुख्त” (धीमी आंच पर पकाने की कला) थी। यह मान्यता शाही भोजन के अलावा चौक, हजरतगंज और अमीनाबाद जैसे इलाकों में सदियों से चल रहे सड़क भोजन की परंपराओं को भी बताती है। लखनऊ की पाक-पर्यटन (culinary tourism) की वैश्विक स्वीकृति से उम्मीद है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और छोटे खाद्य व्यापारियों को नए अवसर मिलेंगे।
वैश्विक पहचान:
यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क (UCCN) में शामिल होने से लखनऊ को दुनिया भर में एक नई पहचान मिली है। जो शहर रचनात्मकता और सांस्कृतिक उद्योगों को निरंतर शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं, उन शहरों को बढ़ावा देना इस संस्थान का लक्ष्य है।
इसपर मोदी जी क्या बोले:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि “लखनऊ एक जीवंत संस्कृति का उदाहरण है, जिसके मूल एक बेहतरीन पाक संस्कृति है।” मैं खुश हूँ कि यूनेस्को ने उस संस्कृति को बढ़ावा देते हुए लखनऊ को इसमें मान्यता प्रदान की है।
लखनऊ के लिए यह उपाधि सिर्फ एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि दुनिया को अपनी विशिष्ट पाक-कला और ‘तहज़ीब’ (शिष्टाचार) को दिखाने का एक बड़ा अवसर है, जहां भोजन केवल भोजन नहीं, बल्कि आतिथ्य, कला और सदियों पुरानी सांस्कृतिक दर्शाने का एक माध्यम है।
