कामना कासोटिया भोपाल:

संजय पाठक: राजनीति, दौलत और विवादों से घिरे कटनी के विधायक

मध्य प्रदेश की राजनीति में जब भी सबसे अमीर विधायकों की चर्चा होती है, तो कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का नाम सबसे ऊपर आता है। करोड़ों की संपत्ति और चमकदार जीवनशैली के बावजूद वे अक्सर विवादों और आरोपों के घेरे में भी रहते हैं। आइए जानते हैं कि संजय पाठक कौन हैं, उनके पास कितनी संपत्ति है और उन पर कौन-कौन से गंभीर आरोप लगे हैं।

राजनीतिक सफर

संजय पाठक मूल रूप से कटनी जिले से आते हैं। शुरुआत में उन्होंने कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। विजयराघवगढ़ सीट से वे कई बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे अपने क्षेत्र में एक मज़बूत नेता के रूप में स्थापित हो गए।

राजनीति में उनकी पहचान सिर्फ़ एक विधायक की नहीं बल्कि एक बड़े कारोबारी और संसाधनों से भरपूर व्यक्ति की भी है। यही वजह है कि वे अक्सर मीडिया और जनता के बीच सुर्खियों में रहते हैं।

दौलत और संपत्ति

संजय पाठक मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाते हैं।

  • MyNeta (ADR) के अनुसार, उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में जो हलफ़नामा दाख़िल किया था, उसमें उनकी और उनकी पत्नी निधि पाठक की कुल संपत्ति लगभग ₹242 करोड़ बताई गई।
  • उनकी संपत्ति में चल (जैसे नकदी, गाड़ियाँ, शेयर आदि) और अचल संपत्ति (जैसे ज़मीन, मकान, खदानें आदि) शामिल हैं।
  • रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके ऊपर व्यक्तिगत कर्ज़ भी है, लेकिन इसके बावजूद उनकी कुल संपत्ति राज्य के ज़्यादातर नेताओं से कई गुना अधिक है।

इसी वजह से लोग उन्हें रईस विधायक” कहकर बुलाते हैं।

विवाद और आरोप

हालांकि संजय पाठक का नाम अक्सर उनकी संपत्ति और शान-शौकत की वजह से सामने आता है, लेकिन उतनी ही बार वे गंभीर आरोपों और विवादों में भी घिरते रहे हैं।

1. अवैध खनन का मामला

संजय पाठक की कंपनियों — आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पेसिफिक एक्सपोर्ट — पर अवैध खनन का आरोप है। सरकारी जांच में पाया गया कि इन कंपनियों ने तय सीमा से अधिक खनन किया है। इसके चलते उन पर 443 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया गया। यह मामला विधानसभा से लेकर अदालत तक में चर्चा का विषय रहा।

2. जज को प्रभावित करने का प्रयास

2025 में जब अवैध खनन से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में चल रहा था, तो जस्टिस विशाल मिश्रा ने अपने आदेश में लिखा कि संजय पाठक ने उनसे सीधे संपर्क करने की कोशिश की। इसे न्यायपालिका में हस्तक्षेप की कोशिश माना गया। नतीजा यह हुआ कि जज ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। यह घटना मीडिया की सुर्खियों में छाई रही और विधायक की छवि पर बड़ा असर पड़ा।

3. आदिवासी ज़मीन पर कब्ज़े का आरोप

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि दिंडोरी जिले की करीब 795 एकड़ आदिवासी भूमि को उनकी कंपनियों ने खरीदा या कब्ज़ा कर लिया। आदिवासी संगठनों ने इसे लेकर विरोध दर्ज कराया और सरकार से कार्रवाई की मांग की। यह आरोप अभी भी जांच और बहस का विषय है।

4. हवाला कांड से जुड़ाव

2017 में एक बड़े ₹500 करोड़ के हवाला कांड का खुलासा हुआ था, जिसमें संजय पाठक का नाम भी सामने आया। हालांकि उस समय जांच पूरी होने से पहले ही संबंधित पुलिस अधिकारी का ट्रांसफर कर दिया गया और मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया। इससे यह सवाल उठे कि क्या सत्ता और पैसे के बल पर मामला दबा दिया गया।

छवि और असर

संजय पाठक की छवि जनता के बीच दो तरह से बनी हुई है।

  • एक ओर वे क्षेत्र में विकास कार्य कराने वाले, मददगार और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।
  • दूसरी ओर, उन पर लगे आरोप और विवाद उन्हें हमेशा सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं।

राजनीति में उनकी पकड़ मज़बूत है, लेकिन कानूनी लड़ाइयों और लगातार लगते आरोपों ने उनकी विश्वसनीयता को झटका दिया है।

कटनी के संजय पाठक सिर्फ़ एक विधायक नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का ऐसा नाम हैं, जिनके पास बेहिसाब दौलत है और जिन पर लगातार गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं। अवैध खनन से लेकर हवाला और जमीन कब्ज़े जैसे मामलों में उनका नाम जुड़ चुका है।

फिर भी, उनकी राजनीतिक यात्रा अब तक जारी है। उनके समर्थक उन्हें क्षेत्र के विकास का चेहरा मानते हैं, जबकि विरोधी उन्हें सत्ता और दौलत का इस्तेमाल कर कानून से बचने वाला बताते हैं।

सच यही है कि संजय पाठक आज मध्य प्रदेश की राजनीति में एक ऐसी शख्सियत बन चुके हैं जिनकी कहानी सत्ता, संपत्ति और विवाद — तीनों से मिलकर लिखी गई है।

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