Madhya Pradesh Human Rights Commission

रोहित रजक भोपाल।
मध्यप्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग ने हाल ही में मानवाधिकार हनन से जुड़े कई मामलों में संज्ञान लेते हुए भोपाल नगर निगम आयुक्त, जबलपुर, उमरिया और कटनी जिलों के कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने इन अधिकारियों से समय सीमा में जवाब मांगा है।

भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र में स्थित शाहजहांनी पार्क के पास दो रैन बसेरों और दानेश्वर उपाध्याय रसोई की दीवारों और छत से लगातार पानी टपकने की शिकायत पर आयोग ने नगर निगम भोपाल से तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। आमजन को मूलभूत सुविधाएं न मिलने पर यह मामला संज्ञान में लिया गया।

वहीं जबलपुर जिले के बेलखेडा थाना अंतर्गत ग्राम बेलखेडी में एक किसान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में आयोग ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक जबलपुर को नोटिस भेजकर एक माह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

उमरिया जिले से जुड़े एक गंभीर मामले में, कोतवाली थाना अंतर्गत अंतर्वात अमदी गांव में छह ग्रामीणों ने एक युवक को जादू-टोने के शक में लाठियों और डंडों से पीट-पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। आयोग ने इस अमानवीय घटना का संज्ञान लेते हुए उमरिया कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

इसके साथ ही सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के जंगल में भालू के हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी। मृतक मवेशी चराने जंगल गए थे, जहां अचानक एक भालू ने हमला कर दिया। इस गंभीर मामले में आयोग ने मुख्य वन संरक्षक सीधी से जवाब मांगते हुए वन अधिकारी से विस्तृत प्रतिवेदन बुलाया है।

कटनी जिले के बड़वारा तहसील अंतर्गत बर्नमहुआ गांव से खितौली मार्ग पर पुल नहीं होने के कारण वहां के ग्रामीणों, विशेष रूप से स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर आना-जाना करना पड़ रहा है।

यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। आयोग ने कलेक्टर कटनी से इस मार्ग पर पुल निर्माण की प्रगति पर एक माह के भीतर प्रतिवेदन मांगा है।

इन सभी मामलों में आयोग का कहना है कि जनता की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

यदि इन दायित्वों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आयोग का उद्देश्य है कि इन मामलों में समय पर कार्रवाई हो और पीड़ितों को न्याय मिले।

राज्य मानव अधिकार आयोग ने इन सभी मामलों में स्पष्ट किया है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

आयोग की यह सक्रियता प्रशासन को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।स्थानीय जनता ने आयोग की इस तत्परता की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि इन मामलों में जल्द ही सुधार देखने को मिलेगा।

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