Baljinder Kaur: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ तकनीक का विषय नहीं रहा बल्कि यह हर सेक्टर की कार्यप्रणाली बदल रहा है। बैंकिंग सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक AI और ऑटोमेशन के कारण बैंकिंग क्षेत्र में करीब 30 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे जहां एक ओर बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी वहीं दूसरी ओर लाखों कर्मचारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी होंगी।

कैसे बदल रही है बैंकिंग की दुनिया?
पहले जहां बैंकिंग में हर काम मैन्युअली होता था आज वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और AI आधारित सिस्टम ने बड़ी भूमिका निभानी शुरू कर दी है। अकाउंट खोलना, लोन अप्रूवल, KYC, कस्टमर सपोर्ट और फ्रॉड डिटेक्शन जैसे काम अब तेजी से ऑटोमेट हो रहे हैं। AI सिस्टम कम समय में ज्यादा सटीक फैसले ले पा रहे हैं जिससे बैंकों का खर्च कम और मुनाफा ज्यादा हो रहा है।

क्या सभी नौकरियां खत्म हो जाएंगी?

ऐसा नहीं है कि AI आने से सारी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। बल्कि बैंकिंग में नए तरह के रोल भी पैदा होंगे। डेटा एनालिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, AI मैनेजर और टेक्नोलॉजी कंसल्टेंट जैसी नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ेगी। यानी जो कर्मचारी खुद को नई तकनीक के अनुसार ढाल लेंगे उनके लिए मौके भी मौजूद रहेंगे।

किन नौकरियों पर होगा सबसे ज्यादा खतरा?
सबसे ज्यादा असर क्लर्क, डेटा एंट्री ऑपरेटर, टेली-कस्टमर सपोर्ट और बैक-ऑफिस स्टाफ पर पड़ सकता है। ये ऐसे काम हैं जिन्हें AI और मशीन लर्निंग आसानी से कर सकती है। चैटबॉट्स पहले ही कस्टमर के सवालों का जवाब देने लगे हैं जिससे कॉल सेंटर्स की जरूरत कम होती जा रही है।

कर्मचारियों के लिए क्या है रास्ता?

बैंकिंग कर्मचारियों को समय रहते स्किल अपग्रेड करना होगा। डिजिटल स्किल्स, डेटा एनालिटिक्स, AI की बेसिक समझ और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में ट्रेनिंग लेना भविष्य के लिए जरूरी हो गया है। कई बैंक पहले ही अपने कर्मचारियों को री-स्किल और अप-स्किल करने पर जोर दे रहे हैं।

ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
AI के इस्तेमाल से बैंकिंग सेवाएं ज्यादा तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होंगी। 24×7 कस्टमर सपोर्ट, धोखाधड़ी की तुरंत पहचान और पर्सनलाइज्ड बैंकिंग सेवाएं ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाएंगी। इससे बैंक और ग्राहक दोनों को फायदा होगा।

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