रिपोर्ट, काजल जाटव: फौजा सिंह का नाम ही हमें यह सिखाता है कि उम्र कोई मायने नहीं रखती। वो न सिर्फ दुनिया के सबसे बुजुर्ग मैराथन रनर के तौर पर जाने जाते हैं, बल्कि उन्होंने ये भी साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति, अनुशासन और पॉजिटिव सोच से किसी भी मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है। आज 110 वर्ष की आयु के चलते वे हमारा साथ छोड़कर जा चुके हैं।

शुरुआती जीवन और संघर्ष

फौजा सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1911 को पंजाब के बेअस शहर के पास हुआ था। उनका शुरुआती जीवन आम किसान परिवार में बीता। बचपन में वो बहुत कमजोर और पतले-पतले थे, इतना ही नहीं डॉक्टर्स ने कह दिया था कि शायद कभी चल ही न पाएंगे। लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंज़ूर था। उनका दौड़ना तब शुरू हुआ जब बहुत से लोग रिटायरमेंट को सोच रहे थे। 89 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार गंभीरता से मैराथन में हिस्सा लिया। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो दुनिया की सबसे कठिन मैराथनों में भाग लेते गए जैसे लंदन, न्यू यॉर्क, टोरंटो दौड़।

इतिहास रचने वाला पल

2011 में, जब वो 100 साल के हुए, तब उन्होंने टोरंटो वॉटरफ्रंट मैराथन पूरा किया और सबको हैरान कर दिया। उन्होंने ये 42.195 किलोमीटर की दौड़ महज़ 8 घंटे 11 मिनट में पूरी की, और अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया। हालांकि, उनके पास जन्म प्रमाणपत्र नही था, इसलिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में आधिकारिक मान्यता नहीं मिली, फिर भी पूरी दुनिया ने उनकी इस उपलब्धि की बहुत सराहना की। लोग फौजा सिंह को प्यार से “टर्बन टॉरनेडा” कहते हैं। हर दिन वो लगभग 10 मील की दौड़ लगाते थे, हल्का व्यायाम करते थे, और सादा शाकाहारी खाना खाते थे। वो शराब, तंबाकू, और मांसाहार से भी दूर रहते थे।

उनकी लाइफस्टाइल और सोच हर किसी के लिए प्रेरणा का एक उदाहरण है। उन्होंने कई सामाजिक अभियानों में हिस्सा लिया और नस्लभेद के खिलाफ आवाज़ उठाई। उनका कहना है, “दौड़ मेरे लिए पूजा है। दौड़ते समय मैं ईश्वर से जुड़ जाता हूं।” 2013 में, 102 साल की उम्र में, उन्होंने प्रतिस्पर्धात्मक दौड़ से रिटायरमेंट ले लिया, पर अपनी एक्सरसाइज़ और आम दौड़ जारी रखी। उनकी जिद और आत्मबल आज भी लोगों को हैरान कर देता है। 

फौजा सिंह सिर्फ एक धावक नहीं, बल्कि हिम्मत, दृढ़ता और विश्वास का प्रतीक हैं। उनका जीवन इस बात का सुबूत है कि उम्र अपने आप में कोई दीवार नहीं है। जब दिल में जुनून हो, तो किसी भी मोड़ पर मंजिल हासिल की जा सकती है।

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