Muskan Garg: आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही स्क्रीन देखना और रात को देर तक मोबाइल चलाते-चलाते सो जाना अब आम आदत बन गई है। लेकिन यह आदत धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। हाल ही में एम्स (AIIMS) भोपाल के एक अहम शोध ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि मोबाइल की अत्यधिक लत और रतजगे (नींद की कमी) से कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

क्या कहता है AIIMS भोपाल का शोध?
AIIMS भोपाल के शोधकर्ताओं के अनुसार, जो लोग देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, उनमें नींद का प्राकृतिक चक्र (सर्कैडियन रिदम) प्रभावित होता है। लगातार रतजगे से शरीर में बनने वाला मेलाटोनिन हार्मोन कम हो जाता है। यह हार्मोन न सिर्फ अच्छी नींद के लिए ज़रूरी है, बल्कि कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में भी अहम भूमिका निभाता है।

मोबाइल स्क्रीन की नीली रोशनी क्यों है खतरनाक?
मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन है। इससे दिमाग सतर्क बना रहता है और नींद आने में देरी होती है। लंबे समय तक ऐसा होने से हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है, जो आगे चलकर स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर जैसे जोखिमों को बढ़ा सकता है।

युवाओं में बढ़ता खतरा:
शोध में यह भी सामने आया है कि युवा वर्ग और किशोर सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और ओटीटी प्लेटफॉर्म की लत उन्हें देर रात तक जागने पर मजबूर कर रही है। नींद की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जिससे शरीर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में असमर्थ हो जाता है।

डॉक्टरों की चेतावनी और सलाह:
AIIMS भोपाल के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते जीवनशैली में बदलाव नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में कैंसर के मामलों में और इजाफा हो सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि:
• सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद करे।
• रोज़ाना 7–8 घंटे की गहरी नींद लें।
• रात में डार्क मोड या नाइट मोड का सीमित उपयोग करें।
• नियमित योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें।

अब भी समय है संभलने का:
मोबाइल तकनीक ने हमारी ज़िंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसकी लत जानलेवा साबित हो सकती है। AIIMS भोपाल का यह शोध एक चेतावनी की घंटी है कि अगर हम आज नहीं संभले, तो भविष्य में इसकी कीमत भारी पड़ सकती है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि हम मोबाइल से दूरी और नींद से दोस्ती करें।

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