कामना कासोटिया भोपाल:

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नई दिल्ली  देशभर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर अहम सुनवाई हुई। इस मामले में कई राज्यों और नगर निकायों की तरफ से जवाब पेश किया गया, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़ी एक अर्जी को उनके वकील ने वापस ले लिया।

क्या है मामला

पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं में तेज़ी आई है। कई राज्यों में लोग इन घटनाओं से परेशान हैं और कई बार हिंसक विरोध भी देखने को मिला है। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी, जिसमें आवारा कुत्तों के नियंत्रण और लोगों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई। इस मामले में पहले भी कई बार सुनवाई हो चुकी है, और कोर्ट ने केंद्र व राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी कि वे इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आवारा कुत्तों का मुद्दा गंभीर है, क्योंकि इसमें नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पशु अधिकार—दोनों पहलू शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे ऐसा संतुलन बनाना होगा जिससे इंसानों और जानवरों दोनों को नुकसान न हो।

जस्टिस की बेंच ने राज्यों से कहा कि वे इस समस्या पर ठोस और ज़मीनी स्तर पर असर डालने वाले कदम उठाएं। केवल कागज़ी रिपोर्ट या योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वह सख्त निर्देश देने पर मजबूर होगी।

राज्यों का रुख

कई राज्यों ने कहा कि वे पहले से ही आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम चला रहे हैं। साथ ही, आश्रय गृह (शेल्टर) बनाने और लोगों को जागरूक करने के अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि इन कदमों के बावजूद घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए योजनाओं को और प्रभावी बनाना जरूरी है।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की है और राज्यों से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट मांगी है। इसमें यह बताना होगा कि अब तक कितने कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हुआ, कितने आश्रय गृह बनाए गए और कितनी घटनाओं में कमी आई है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस समस्या का समाधान केवल कानूनी आदेशों से नहीं होगा, बल्कि समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही संभव है। इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा कि कुत्तों के साथ कैसा व्यवहार करें और उन्हें हिंसा का शिकार न बनने दें।

नतीजा

आज की सुनवाई में जहां आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान पर चर्चा हुई । अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट क्या ठोस दिशा-निर्देश जारी करता है और क्या यह लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की ओर कोई ठोस कदम बन पाता है।

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