Baljinder Kaur: मोबाइल फोन और इंटरनेट ने बच्चों की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। जो खेल कभी मैदानों में खेले जाते थे, वे अब मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गए हैं। ऑनलाइन गेमिंग को अक्सर मनोरंजन और दिमागी विकास का जरिया बताया जाता है, लेकिन इसके पीछे छुपा एक खतरनाक सच अब सामने आ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां ऑनलाइन गेमिंग बच्चों की मानसिक सेहत और यहां तक कि उनकी जान के लिए खतरा बन चुकी है। यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल है।

ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता जाल

आज 8 से 16 साल तक के बच्चे घंटों मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेल रहे हैं। PUBG, Free Fire, Roblox जैसे गेम बच्चों को रोमांच और जीत का लालच देते हैं। धीरे-धीरे बच्चे इन खेलों के इतने आदी हो जाते हैं कि पढ़ाई, परिवार और असली दुनिया से उनका जुड़ाव कम होने लगता है। गेम जीतने या लेवल बढ़ाने का दबाव उन्हें मानसिक तनाव में डाल देता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर
लगातार स्क्रीन पर रहने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, नींद की कमी और अकेलापन बढ़ रहा है। हारने पर अवसाद और जीतने पर जरूरत से ज्यादा उत्साह बच्चों के मानसिक संतुलन को बिगाड़ देता है। कई मामलों में बच्चे खुद को असफल समझने लगते हैं, जिससे आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम तक देखने को मिले हैं।

इन-गेम खरीदारी और आर्थिक दबाव
कई गेम्स में पैसे खर्च कर स्किन, हथियार या लेवल खरीदे जाते हैं। बच्चे माता-पिता की जानकारी के बिना पैसे खर्च कर देते हैं। जब रोका जाता है तो वे तनाव में आ जाते हैं। कई बार इसी दबाव में बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं।

जानलेवा चैलेंज और हिंसक कंटेंट
कुछ ऑनलाइन गेम और चैलेंज बच्चों को खतरनाक टास्क करने के लिए उकसाते हैं। जीतने के लिए सब कुछ दांव पर लगाओ जैसी सोच बच्चों के दिमाग में बैठ जाती है। हिंसक दृश्य, हथियारों का प्रयोग और मौत को खेल की तरह दिखाना बच्चों को संवेदनहीन बना रहा है। वे असली और नकली के फर्क को समझ नहीं पाते।

माता-पिता की भूमिका सबसे अहम
बच्चों को सिर्फ मोबाइल थमा देना समाधान नहीं है। माता-पिता को यह समझना होगा कि बच्चा क्या खेल रहा है, कितनी देर खेल रहा है और उसके व्यवहार में क्या बदलाव आ रहा है। बच्चों से खुलकर बात करना, समय की सीमा तय करना और उन्हें आउटडोर खेलों की ओर प्रेरित करना बेहद जरूरी है।

समाधान और जागरूकता जरूरी
सरकार, स्कूल और अभिभावकों को मिलकर ऑनलाइन गेमिंग के खतरों को समझना होगा। बच्चों के लिए सख्त डिजिटल नियम, उम्र के अनुसार कंटेंट और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना समय की मांग है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *