Muskan Garg: विवाह पंचमी का पावन पर्व आज अयोध्या धाम में ऐसे मनाया गया, मानो त्रेता युग फिर से धरती पर अवतरित हो गया हो। भगवान श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह की स्मृति में हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरे नगर में अलौकिक उत्साह दिखाई दिया। मंदिरों में विशेष पूजन, भजन-कीर्तन, शोभायात्राएं और संतों की दिव्य वाणी, भजनों से वातावरण अनुपम भक्ति रंग में रंग चुका था।

अयोध्या में दिव्य सजावट: श्री राम लाला की साकेत नगरी हर गली बन गई श्री वैकुंठ सी दिव्य:
सुबह से ही पूरी अयोध्या नगरी वहां की अभी गलियां फूलों, रोशनियों और शुभ मंगल कलशों से सजी हुईं थी। श्री रामलला मंदिर के मंदिर को स्वर्णिम रोशनी से अलंकृत किया गया था। ऐसा लगता था कि माता सीता स्वयं जनकपुर से चलकर अयोध्या धाम को पुनः शुद्ध कर रही हो। मंदिरों में घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को और दिव्य बना दिया था।

संतों और श्रद्धालुओं में उमड़ा प्रेम भक्ति रस: भक्ति और प्रेम का अद्भुत उत्सव:
आज देशभर से हजारों संत, महंत और श्रद्धालु अयोध्या में पहुंचकर इस महान पर्व के साक्षी बने। रामकथा पंडालों में प्रवचन हुए, जहां संत समाज ने विवाह पंचमी का महत्व बताया। सभी श्रद्धालु “जय सिया राम” कहते हुए भक्ति में डूबे नजर आए। कई जगहों पर रामायण पाठ और भजन संकीर्तन हुआ, जिसमें भक्तों ने झूमते हुए भाग लिया।

बैंड की धुनों पर नाचे संत और भक्त: उत्सव अविस्मरणीय मानो स्वयं श्री राम लला बारात लेकर आ रहे हो:
श्रीसीताराम विवाह बारात निकाले जाने के दौरान अयोध्या की गलियां मानो उत्सव के सागर में डूब गईं। बैंड-बाजे की मधुर धुनें, नगाड़ों की गूंज और शहनाई की लहरियां स्वर वातावरण में गूंज उठीं। सबसे आकर्षक दृश्य तब देखने को मिला जब संत और भक्त मिलकर बैंड और ढोल की धुनों पर झूमते हुए नज़र आए। भक्ति और हर्ष का ऐसा संगम कम ही देखने को मिलता है: जहां साधु-संतों की गंभीरता और भक्तों का उल्लास एक ही सुर में रंग जाए। यह दृश्य हर किसी के हृदय में आनंद की तरंगें भर रहा था और कोई भी अपने पैरो को उस दिव्य आनंद में थिरकने से नहीं रोक पा रहा था।

श्री सीताराम विवाह का जीवंत नजारा: श्री त्रेता युग का एहसास कराता था:
रामायण पर आधारित नाट्य मंचन (रामलीला) ने श्री सीता जी का स्वयंवर और विवाह की अद्भुत झांकी प्रस्तुत की गई। भगवान श्री राम की वीरता, माता सीता की दया और जनकपुर से अयोध्या तक विवाह उत्सव की परंपरा का जीवंत चित्रण किया गया। मंडप में वैदिक रीति से जयमाला, फेरे और आशीर्वाद के दृश्य इतने भावपूर्ण थे कि हजारों श्रद्धालु स्वयं को त्रेता युग में होने का अनुभव करने लगे थे।

श्रद्धा, प्रेम, विश्वास और भक्ति का महामिलन:
विवाह पंचमी का यह उत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम और मर्यादा का संदेश है: मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और माता जानकी के आदर्श दांपत्य से हमें मिलता है। अयोध्या आज केवल एक नगरी नहीं, बल्कि भक्ति का महासरोवर बन गई, जहां हर दिल रामभक्ति की लहरों में डूबा हुआ था। इस वर्ष का उत्सव संतों की आनंदमय नृत्य-झूमती झांकियों, गूंजते जयकारों और देवदंपति की दिव्य ऊर्जा के कारण हर किसी के लिए अविस्मरणीय बन गया।
जय श्री राम जय माता जानकी




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *