Muskan Garg: दिल्ली-NCR की खतरनाक वायु गुणवत्ता एक बार फिर मासूमों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। ताज़ा मामला एक 5 वर्षीय बच्चे का है, जिसकी लगातार सूजन और दर्द के कारण टॉन्सिल्स हटाने की सर्जरी करनी पड़ी। बच्चे की मां का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण और जहरीली हवा ने बच्चे की सेहत को इस कदर प्रभावित किया कि दवाइयों और उपचार के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं आया।
मां ने लगाया आरोप: “प्रदूषण ने बच्चे की सेहत बिगाड़ दी”:
बच्चे की मां ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से उसके बेटे को गले में बार-बार संक्रमण, सूजन, और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उन्होंने कहा: “हम डॉक्टरों के पास कई बार गए, दवाइयाँ भी दी गईं, लेकिन जैसे ही बाहर की हवा खराब होती, बच्चा फिर बीमार पड़ जाता। आखिरकार डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी। ” दिल्ली-NCR में AQI लगातार 300-500 के बीच रहने से खासकर छोटे बच्चों में एलर्जी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में टॉन्सिल और ऐडेनॉइड से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी: बच्चों पर प्रदूषण का असर तेजी से बढ़ रहा है:
ईएनटी विशेषज्ञों का दावा है कि पिछले दो से तीन वर्षों में, गले में एलर्जी की समस्याएं, एक बार में संक्रमण, नाक बंद होना, सांस लेने में परेशानी, निरंतर खांसी के मामलों में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार,
“छोटे बच्चों की इम्यूनिटी विकसित हो रही होती है। ऐसे में प्रदूषण के कण सीधे गले और फेफड़ों पर असर डालते हैं, जिससे अक्सर टॉन्सिल्स इतने बढ़ जाते हैं कि सर्जरी अनिवार्य हो जाती है।”
टॉन्सिल सर्जरी क्यों बन रही मजबूरी?
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब, टॉन्सिल्स बार-बार संक्रमित हों, खाना निगलने में कठिनाई हो, सांस लेने में बाधा आने लगे, बच्चे की नींद प्रभावित होने लगे, तो सर्जरी ही सुरक्षित विकल्प रह जाती है।
प्रदूषण से बचाव कैसे करें?
डॉक्टरों ने बताया कि माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए ये कुछ उपाय कर सकते हैं, घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग, बच्चों को हर सुबह बाहर निकालने से बचें, मास्क लगाना, गुनगुने पानी और भाप का सेवन करें, पौष्टिक भोजन से इम्युनिटी बढ़ाना।
बढ़ता प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के हजारों बच्चों की समस्या है, न कि सिर्फ एक परिवार की। बढ़ता प्रदूषण अब एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य खतरा बन गया है और यह सिर्फ अस्थायी समस्या नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा, बच्चों में ऐसी सर्जरी के मामलों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। अब सवाल यह है कि हम कब तक प्रदूषण को यूँ ही बच्चों की सेहत से खेलने देंगे?
