रिया सिन्हा: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। केजरीवाल ने इस चुनाव को आरएसएस और संविधान के बीच की लड़ाई बताया है, क्योंकि NDA का उम्मीदवार आरएसएस से जुड़ा है जबकि विपक्ष का उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं।
आम आदमी पार्टी ने भाजपा से दूरी बनाकर विपक्ष का साथ क्यों दे रही है ?
इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी ने भाजपा से दूरी बनाकर विपक्ष का साथ देने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी खेमे ने सर्वसम्मति से एक साझा उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, ताकि राष्ट्रपति चुनाव में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए मजबूत संदेश दिया जा सके।
केजरीवाल का मानना है कि, देश को वर्तमान समय में ऐसे राष्ट्रपति की आवश्यकता है, जो संविधान की गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखे।
अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका
AAP के इस निर्णय को विपक्षी गठबंधन के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। पार्टी के पास लोकसभा और राज्यसभा में भले ही सीमित संख्या हो, लेकिन दिल्ली और पंजाब की विधानसभाओं में बहुमत होने के कारण उसके वोट राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि विपक्षी खेमे ने आम आदमी पार्टी को साथ लाने के लिए गहन संवाद किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे आगामी लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता को बल मिलेगा और केंद्र सरकार पर दबाव भी बढ़ेगा।
राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अब तेज हो गई हैं और केजरीवाल का यह ऐलान निश्चित रूप से सियासी समीकरणों को प्रभावित करेगा।
