कामना कासोटिया भोपाल:

 चुनाव आयोग ने जारी की नई मतदाता सूची, कुल मतदाताओं की संख्या अब 7.42 करोड़ के पार

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) पूरा कर लिया है। इस प्रक्रिया के बाद जारी की गई नई मतदाता सूची में 21.53 लाख नए नाम जोड़े गए हैं, जबकि 3.66 लाख अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इस नई सूची के अनुसार, बिहार में कुल 7.42 करोड़ मतदाता अब मतदान के लिए पात्र हैं।

 क्या होता है गहन पुनरीक्षण (SIR)?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग राज्य भर की मतदाता सूचियों की समीक्षा करता है। इसमें यह देखा जाता है कि कौन से मतदाता अब योग्य नहीं हैं (जैसे कि मृत्यु, स्थानांतरण या डुप्लिकेट नामों के कारण) और साथ ही नए योग्य नागरिकों को सूची में जोड़ा जाता है।

इस बार यह प्रक्रिया 1 अगस्त 2025 से शुरू की गई थी और सितंबर के अंत तक पूरी कर ली गई।

 पटना जिले में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी

नई सूची में सबसे ज़्यादा मतदाताओं की बढ़ोतरी पटना जिले में देखने को मिली है। अकेले पटना में ही 1.63 लाख नए मतदाता जुड़े हैं। पहले इस जिले में कुल 46.5 लाख मतदाता थे, जो अब बढ़कर लगभग 48.13 लाख हो गए हैं।

 हटाए गए नामों पर विपक्ष का सवाल

जहां एक ओर नए मतदाताओं का नाम जुड़ना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हटाए गए नामों पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इस प्रक्रिया को “छलावा” बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर “राजनीतिक दबाव” में काम करने का खतरा है।

राजेश राम का कहना है कि “बिना उचित जांच के लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इससे लोकतंत्र को चोट पहुंच सकती है।”

 सुप्रीम कोर्ट की भी नज़र

चूंकि पहले जारी ड्राफ्ट सूची में 65 लाख नाम हटाए जाने की बात सामने आई थी, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में ध्यान दिया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि हटाए गए नामों की पूरी जानकारी और कारण स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किए जाएं।

 किस वर्ग के मतदाता जुड़े?

चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक नए मतदाता 18 से 21 वर्ष की उम्र वाले युवा हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पहली बार मतदान करने वाले युवा बड़ी संख्या में इस बार चुनाव में भाग ले सकते हैं।

 चुनाव आयोग की सफाई

चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार की गई है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाना जरूरी था ताकि निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें।

अब आगे क्या?

बिहार में विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग अक्टूबर अंत तक चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। माना जा रहा है कि मतदान 3 चरणों में नवंबर महीने में हो सकता है।

बिहार में मतदाता सूची का यह विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जहां एक ओर लाखों नए मतदाता जुड़ने से लोकतंत्र मजबूत हो रहा है, वहीं विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल यह भी दर्शाते हैं कि पारदर्शिता और विश्वास को बनाए रखना कितना आवश्यक है।

अब देखना होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में यह बदलाव क्या प्रभाव डालते हैं।

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