ऋषिता गंगराडे़
मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहे ओबीसी आरक्षण विवाद को सुलझाने के लिए आज मुख्यमंत्री निवास पर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ विभिन्न दलों के प्रदेशाध्यक्ष शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य ओबीसी आरक्षण को लेकर जारी असमंजस को दूर करना और सर्वसम्मति से कोई ठोस रास्ता निकालना था।
कांग्रेस और विपक्ष का प्रतिनिधित्व
बैठक में कांग्रेस की ओर से पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। इसमें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से स्पष्टता और ठोस कदम उठाने की मांग की। उनका कहना था कि ओबीसी समाज को संवैधानिक अधिकारों के तहत उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और सरकार को इस दिशा में जल्द निर्णय लेना होगा।
अन्य दलों की भागीदारी
सर्वदलीय बैठक में आप पार्टी की प्रदेशाध्यक्ष रानी अग्रवाल, बसपा प्रदेशाध्यक्ष रमाकांत पिंपल और सपा प्रदेशाध्यक्ष मनोज यादव भी पहुंचे। सभी ने अपनी-अपनी राय रखते हुए कहा कि ओबीसी समाज की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए उचित नहीं होगा।
आयोग और मंत्री भी रहे मौजूद
बैठक में ओबीसी आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमारिया, कैबिनेट मंत्री कृष्णा गौर और नारायण सिंह कुशवाह भी मौजूद रहे। आयोग की ओर से वर्तमान कानूनी और संवैधानिक स्थिति पर जानकारी दी गई। वहीं मंत्रियों ने सरकार की पहल और अब तक उठाए गए कदमों की रूपरेखा सामने रखी।
सहमति की दिशा में पहल
बैठक में किसी ठोस फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन सभी दल इस मुद्दे पर सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़े। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में आयोग की सिफारिशों और विधिक राय के आधार पर सरकार कोई बड़ा निर्णय ले सकती है।
ओबीसी आरक्षण का मुद्दा मध्यप्रदेश की राजनीति में लंबे समय से केंद्र में रहा है। आज की सर्वदलीय बैठक ने यह संकेत दिया है कि सरकार और विपक्ष दोनों ही इस मामले को सुलझाने के लिए गंभीर हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह पहल कितनी सार्थक सिद्ध होती है और ओबीसी समाज की मांगों को किस हद तक पूरा किया जाता है।
स्रोत:
- भोपाल स्थित राजनीतिक सूत्र
- सर्वदलीय बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों से मिली जानकारी
- प्रदेश स्तरीय ग्राउंड इनपुट
