Muskan Garg: बिहार की नवनिर्वाचित विधायक और लोकप्रिय लोक-गायिका मैथिली ठाकुर ने 2025 में भाजपा के टिकट पर अलीनगर (दरभंगा) विधानसभा सीट जीतकर राज्य की अब तक की सबसे कम उम्र की विधायक बनने का मुकाम हासिल किया है। उनकी इस जीत को भाजपा की एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने बिहार के पारंपरिक दिग्गजों को पराजित कर जनादेश हासिल किया है।
शपथ के पलों से उजागर की मिथिला संस्कृति:
पहले विधानसभा सत्र के शपथ ग्रहण समारोह में मैथिली ठाकुर ने साधारण राजनीति से हटकर एक सांस्कृतिक और पहचान भरा संदेश दिया। उन्होंने पीली “मधुबनी पेंटिंग” वाली साड़ी और पारंपरिक “मिथिला पाग” पहनकर शपथ ली, जो सिर्फ एक पोशाक नहीं, बल्कि मिथिला की अस्मिता और गौरव का प्रतीक है और सबसे खास बात उन्होंने अपनी शपथ भाषा में भी गंवाई नहीं मैथिली भाषा में शपथ ली इस पल ने दिखाया कि राजनीति में आने का मतलब केवल सत्ता नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति और लोक-भाषा को सम्मान देना भी है।
गायिका से विधायक: संघर्ष, लोकप्रियता और भरोसे का सफर:
मैथिली ठाकुर का नाम पहले संगीत जगत में लोक और शास्त्रीय गायिका के नाम से था। हालांकि वह कई रियलिटी-शो में असफल रह चुकी थीं, पर उन्होंने हार नहीं मानी। उनके परिवार को 17 बार घर बदलना पड़ा। फिर भी उन्होंने संघर्ष जारी रखा। आज, उसी संघर्ष ने उन्हें राजनीति में सफल बनाया है। युवा उम्र ने उनकी जीत ने यह संदेश दिया है कि नव-जोश, कला, हुनर, संस्कृति और जनता के बीच भरोसे से राजनीति में नई उम्मीदें जगाई जा सकती हैं।
जनता और क्षेत्र के लिए उनकी प्राथमिकताएँ: काम की शुरुआत:
शपथ लेने के बाद मैथिली ठाकुर ने कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य है अपने क्षेत्र अलिनगर की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना। वह शिक्षा, विकास, युवाओं को नए अवसर और मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को प्रोत्साहित करना चाहती हैं। अपने पहले कार्यकाल में वह जनता के बीच रहकर उनकी आवाज़ बनना चाहती हैं। उनकी यह शुरुआत सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बिहार के युवा-वोटरों, महिलाओं और मिथिला क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन सकती है।
मिथिला की बेटी, बिहार की नई चमकती हुई उम्मीद:
मैथिली ठाकुर का यह कदम दिखाता है कि राजनीति अब सिर्फ पुराने नेताओं की राजनीति नहीं है। युवा या कला-संस्कृति से जुड़े लोग भी राजनीति में नए विचार और ऊर्जा ला सकते हैं। 25 साल की उम्र में विधायक बनकर साड़ी, पाग और अपनी मातृभाषा के साथ मैथिली ने दिखा दिया कि अपनी अस्मिता और अपनी जनता के बीच खड़े होकर भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। भविष्य चाहे जैसा भी हो आज मिथिला और बिहार दोनों के लिए गर्व की बात है कि उन्होंने एक नई शुरुआत की है।
