Muskan Garg: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस 2026 पर राजपथ (कर्तव्य पथ) एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने जा रहा है। पहली बार भारतीय सिनेमा को समर्पित एक भव्य झांकी परेड में शामिल होगी, और इस ऐतिहासिक प्रस्तुति की कमान संभालेंगे संजय लीला भंसाली। अपनी भव्यता, सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक गहराई के लिए मशहूर भंसाली अब देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की कहानी कहने जा रहे हैं।
77 साल में पहली बार: सिनेमा को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान:
अब तक गणतंत्र दिवस परेड में राज्यों की सांस्कृतिक झांकियां, सशस्त्र बलों की शक्ति और भारत की विविधता की झलक देखने को मिलती रही है। लेकिन भारतीय सिनेमा, जो दशकों से देश की सॉफ्ट पावर रहा है, उसे पहली बार औपचारिक रूप से इस मंच पर जगह मिल रही है। यह फैसला न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और रचनात्मक उद्योग को राष्ट्रीय सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
संजय लीला भंसाली क्यों हैं इस झांकी के लिए खास?
संजय लीला भंसाली का नाम आते ही भव्य सेट्स, शास्त्रीय संगीत, समृद्ध भारतीय परंपराएं और भावनात्मक गहराई याद आती है। देवदास, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत और गंगूबाई काठियावाड़ी जैसी फिल्मों में उन्होंने भारतीय संस्कृति को जिस भव्यता से परदे पर उतारा है, वही उनकी पहचान है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भंसाली की झांकी भारतीय सिनेमा की 100 साल से ज्यादा की यात्रा को दर्शाएगी मूक फिल्मों से लेकर गोल्डन एरा, समानांतर सिनेमा और आज के ग्लोबल सिनेमा तक।
कैसी होगी इंडियन सिनेमा की ऐतिहासिक झांकी?
झांकी में भारतीय सिनेमा के विभिन्न दौरों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
• शुरुआती दौर के कैमरे और थिएटर सेटअप।
• स्वतंत्रता आंदोलन में सिनेमा की भूमिका।
• सामाजिक बदलाव लाने वाली फिल्में।
• संगीत, नृत्य और तकनीक का विकास।
• आज का भारतीय सिनेमा, जो ऑस्कर और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बना चुका है।
बताया जा रहा है कि झांकी में लाइव परफॉर्मेंस, क्लासिकल म्यूजिक और विजुअल आर्ट का शानदार मेल देखने को मिलेगा।
फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों में उत्साह:
इस घोषणा के बाद फिल्म इंडस्ट्री में जबरदस्त उत्साह नजर आ रहा है। कई कलाकारों और निर्देशकों ने इसे भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का क्षण बताया है। वहीं दर्शकों को उम्मीद है कि यह झांकी न सिर्फ मनोरंजन करेगी, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती से दुनिया के सामने रखेगी।
सिनेमा बना भारत की पहचान:
2026 में गणतंत्र दिवस परेड में इंडियन सिनेमा की झांकी साबित करेगी कि फिल्में भारत की सांस्कृतिक आत्मा और मनोरंजन का साधन हैं। यह झांकी, संजय लीला भंसाली के निर्देशन में, निश्चित रूप से इतिहास रचेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक यादगार अध्याय बन जाएगी।
