सुरभी यादव: भारत की राजधानी दिल्ली में पिछले दो हफ्तों, यानी दिवाली के बाद, लगातार वायु के गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में गिरावट दर्ज हुई है। दिवाली रात के बाद दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है। AQI लगभग 300 से 400 के बीच दर्ज बना हुआ है, जो एयर क्वालिटी की सीमा से लगभग 20 गुना अधिक है। इसी वायु प्रदूषण के निपटारे के लिए दिल्ली सरकार ने क्लाउड सीडिंग का परिक्षण करने का फैसला किया।
क्या होती है क्लाउड सीडिंग
क्लाउड सीडिंग परीक्षण कृत्रिम वर्षा करने का प्रयोग है, जिसमें इस परीक्षण में बारिश करने के लिए बादलों में बदलाव लाने का विज्ञान है। क्लाउड सीडिंग बादलों में नमी के सघन को तेज करता है, जिससे बारिश होती है। नमक के कण बर्फ के केंद्र कणों के रूप में कार्य करते हैं, जिससे बादलों में बर्फ के क्रिस्टल बनते हैं। बादलों में मौजूद नमी फिर इन बर्फ के क्रिस्टलों से चिपक जाती है और संघनित होकर बारिश बन जाती है। इस तकनीक का इस्तेमाल दुनिया भर में किया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह दीर्घकालिक उपाय है।
आपको बता दे कि क्लाउड सीडिंग का सबसे पहला परीक्षण 53 वर्षों पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्था आईआईटी (IIT)कानपुरने शहर में घने कोहरे से निपटारे के लिए शहर में यह परीक्षण किया था, लेकिन यह पूरी तरह सफल नहीं रहा था। इससे पहले भी दिल्ली में पहला क्लाउड सीडिंग का प्रयोग 1997 में किया गया था, जिसके बाद 1952 में एक प्रयोग, एक प्रयास किया गया। एक और प्रयास किया गया जो प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्लाउड सीडिंग का यहां पहला स्वदेशी प्रयास था। वहीं, नई दिल्ली शहर में 2023 में भी वायु प्रदूषण की बढ़ती अधिकता को लेकर इस पर विचार किया गया था, लेकिन अदालत की मंजूरी निलंबित होने के कारण सरकार यह योजना नहीं कर सकी।
दिल्ली क्लाउड सीडिंग की विफलता और राजनीति
दिल्ली में बुधवार को होने वाले क्लाउड सीडिंग का प्रशिक्षण असफल रहा, क्योंकि क्लाउड सीडिंग में तभी सफलता मिलती है जब हवा में करीब 50% नमी हो। वहीं, इस समय हवा में 10 से 15% के करीब नमी थी। वहीं, इस विफलता को लेकर राजनीतिक दलों में राजनीति गरमाई है। दरअसल, दिल्ली सरकार क्लाउड सीडिंग पर करीब 3.32 करोड़ रुपए खर्च कर रही है, जहां एक ट्रायल की कीमत करीब 64 लाख रुपए है।
दिल्ली सरकार का दावा परीक्षण सफल रहा
वहीं, दूसरी ओर दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रायल सफल रहा। दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम में नमी 10 से 15% कम थी, जो क्लाउड सीडिंग के लिए आदर्श नहीं मानी जाती, फिर भी ट्रायल सफल रहा। हवा में मौजूद धूल के कणों की मात्रा में कमी दर्ज की गई है। ट्रायल के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हल्की बारिश हुई।
इस रिपोर्ट को आड़े हाथ लेते हुए आप नेता सौरभ भारद्वाज ने वीडियो बनाकर दिल्ली सरकार के ट्रायल का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “बारिश में भी फर्जीवाड़ा, कृत्रिम वर्षा का कोई नामोनिशान नहीं दिख रहा है। उन्होंने (दिल्ली सरकार) सोचा होगा, देवता इंद्र करेंगे वर्षा, सरकार दिखाएगी खर्चा।”
