कामना कासोटिया भोपाल:

हाल ही में हुए “कफ सिरप कांड” से देश अभी उबरा भी नहीं था कि एक और चौंकाने वाला मामला सामने आ गया है। ग्वालियर के जिला अस्पताल में बच्चों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक सिरप में कीड़े पाए गए, जिससे पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब अस्पताल के बाल रोग विभाग में बच्चों को दी जा रही एज़िथ्रोमाइसीन ओरल सस्पेंशन (Azithromycin Oral Suspension) दवा की एक बोतल में डॉक्टरों ने जीवित कीड़े देखे। यह देखकर तुरंत संबंधित अधिकारी और अस्पताल प्रशासन को सूचना दी गई।

पूरा स्टॉक सील, जांच शुरू

जैसे ही यह खबर फैली, जिला अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस दवा का पूरा स्टॉक सील कर दिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में इस दवा की लगभग 290 यूनिटें मौजूद थीं, जिन सभी को उपयोग से रोक दिया गया है।

अस्पताल प्रशासन ने फार्मेसी से दवा की आपूर्ति रोकने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। साथ ही, औषधि नियंत्रण विभाग (Drug Control Department) की टीम ने मौके पर पहुंचकर 16 सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे हैं।

ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि फिलहाल सभी सैंपल की रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि दवा किस स्तर पर दूषित हुई — निर्माण के समय या भंडारण के दौरान।

कफ सिरप कांड के बाद फिर नया झटका

यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब देशभर में कफ सिरप कांड को लेकर पहले से ही आक्रोश और चिंता का माहौल है। कुछ ही दिनों पहले मध्य प्रदेश के शिवपुरी और अन्य जिलों में जहरीला “कफ सिरप” पीने से 24 से ज़्यादा बच्चों की मौत हुई थी।

उस मामले में कोल्ड्रिफ (Coldrif), रिस्पीफ्रेश (Respifresh) और रीलाइफ (Relife) नामक सिरप के सैंपल में खतरनाक केमिकल पाए गए थे, जिसके बाद इनका उत्पादन और बिक्री रोक दी गई थी।

अब जब ग्वालियर के अस्पताल में फिर से बच्चों की दवा में कीड़े मिलने का मामला सामने आया है, तो लोगों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दवाओं की क्वालिटी चेक व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है।

कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि यह दवा एक प्राइवेट फार्मास्युटिकल कंपनी से खरीदी गई थी। फिलहाल कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, दवा कंपनी को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है।

अगर जांच में दोष साबित हुआ, तो कंपनी पर न केवल जुर्माना लगेगा, बल्कि लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने कहा —

“हमने पूरी सतर्कता से कार्रवाई की है। सभी संदिग्ध सिरप जब्त कर लिए गए हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद अगला कदम तय किया जाएगा।”

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा कि इस घटना के बाद सभी जिलों के अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दे दिए गए हैं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग, औषधि नियंत्रक और जिला प्रशासन की टीमें जांच में जुटी हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि दवा वास्तव में निर्माण के समय दूषित हुई थी या फिर स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन में लापरवाही हुई।

इस बीच, अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह सिरप किसी भी मरीज को न दी जाए।

ग्वालियर की यह घटना देश के दवा नियमन सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाती है। हाल के सिरप कांड के बाद अब एक और घटना ने आम लोगों का भरोसा हिला दिया है। यह जरूरी है कि दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई हो और सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली हर दवा की गुणवत्ता की नियमित जांच हो।

आखिरकार, दवाएं इंसान की जान बचाने के लिए होती हैं — न कि उसे जोखिम में डालने के लिए।

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