कामना कासोटिया भोपाल:

मानपुर की जननेत्री: सुश्री मीना सिंह मांडे का राजनीतिक सफर

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और मानपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार कई बार निर्वाचित हुईं सुश्री मीना सिंह मांडे आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपने सहज स्वभाव, मजबूत नेतृत्व और जनसेवा के लिए समर्पित दृष्टिकोण के कारण वे प्रदेश की राजनीति में एक सशक्त महिला चेहरा बनकर उभरी हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सुश्री मीना सिंह का जन्म 5 नवम्बर 1971 को ग्राम बेलसर, जिला उमरिया में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व. श्री माधव सिंह मांडे है। वे अविवाहित हैं और उन्होंने राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की पढ़ाई की है। उन्हें भजन सुनना और अध्ययन करना पसंद है।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

छात्र जीवन से ही वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं। वानर वनवासी सेवा मंडल और हाई स्कूल मंडला की कार्यकारिणी में उन्होंने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। 1992 में करकुआ रोड इंस्टिट्यूट (इंदौर) से जुड़े महाविद्यालय में खेल समिति की सदस्य रहीं और 1992-94 में वे इंदौर विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि भी बनीं।

1994 में वे जनपद सदस्य चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने बालवाड़ी परियोजना सलाहकार मंडल की अध्यक्षता भी की। उनके नेतृत्व और सामाजिक कार्यों के कारण वे क्षेत्र में लोकप्रिय होती गईं।

विधानसभा चुनाव और मंत्री पद

1996 में वे पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनीं। इसके बाद 2003, 2008, 2013, 2018 और हाल ही में 2023 में छठवीं बार विधायक चुनी गईं। उनका यह लगातार जनादेश इस बात का प्रमाण है कि जनता को उन पर भरोसा है।

सुश्री मीना सिंह मांडे (BJP) ने टिलक राज सिंह (कांग्रेस) को लगभग 25,265 वोट के अंतर से परास्त किया। मीना सिंह को कुल 86,089 वोट मिले जबकि टिलक राज सिंह को 60,824 वोट मिले थे।

विकास कार्य — मणपुर क्षेत्र में क्या-क्या किए गए?

  • मणपुर विधानसभा क्षेत्र पहाड़ी और जनजातीय प्रधान क्षेत्र है, जिसमें कृषि मुख्य व्यवसाय है।
  • इस क्षेत्र में Sanjay Gandhi Thermal Power Station और Bandhavgarh Tiger Reserve जैसे महत्वपूर्ण केंद्र स्थित हैं, जो रोजगार एवं पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।

अन्य योगदान

मीना सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में विशेष कार्य किए हैं। वे पुस्तकालयों के विकास और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रबल समर्थक रही हैं। उन्होंने कई बार आदिवासी समाज की समस्याओं को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया और उनके समाधान के लिए प्रयास किए।

सुश्री मीना सिंह मांडे ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी भी जनसेवा से पीछे नहीं हटीं। उनका जीवन युवाओं और खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे यह साबित करती हैं कि दृढ़ निश्चय, सेवा भाव और ईमानदारी के साथ राजनीति में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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