कामना कासोटिया भोपाल:

रीती पाठक: सेवा, समर्पण और सफलता की मिसाल

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और सीधी (म.प्र.) से निर्वाचित विधायक श्रीमती रीती पाठक का राजनीतिक सफर जनसेवा और समाज उत्थान के लिए समर्पित रहा है। सरल व्यक्तित्व, दृढ़ इच्छाशक्ति और विकास के प्रति समर्पण भावना ने उन्हें जनता के बीच एक लोकप्रिय और विश्वसनीय जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया है।

शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि

श्रीमती रीती पाठक का जन्म 1 जुलाई 1977 को ग्राम-उचहर, जिला-सिंगरौली (मध्य प्रदेश) में हुआ। उनके पिता श्री रामकरण देव पांडे एक शिक्षित और सम्मानित व्यक्ति रहे हैं, जिनके संस्कारों का प्रभाव रीती जी के व्यक्तित्व में साफ नजर आता है। एम.ए., एल.एल.बी. तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अधिवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन समाज सेवा और जनकल्याण की भावना ने उन्हें राजनीति की ओर प्रेरित किया।

रीती पाठक जी का विवाह श्री रंजीत पाठक से हुआ, जो स्वयं भी एक जागरूक और समाजसेवी व्यक्तित्व हैं। उनके दो बच्चे हैं — एक पुत्र और एक पुत्री।

संसद में सशक्त भागीदारी की शुरुआत

श्रीमती पाठक का सक्रिय राजनीतिक जीवन मई 2014 से शुरू हुआ, जब वे लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं। संसद में उन्होंने कोयला और इस्पात, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई समितियों में अपनी भागीदारी निभाई। विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर उन्होंने गहराई से काम किया और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

दूसरी बार सांसद बनकर दिखाया मजबूत नेतृत्व

2019 में वे एक बार फिर लोकसभा के लिए चुनी गईं और इस बार भी उन्होंने कोयला, खान, इस्पात और संसदीय समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में सीधी क्षेत्र में विकास की कई महत्वपूर्ण योजनाएँ लाई गईं। चाहे वह सड़क निर्माण हो, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, शिक्षा में सुधार या महिला सशक्तिकरण की योजनाएँ — हर क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया।

विधायक के रूप में नई जिम्मेदारी

जनवरी 2023 में उन्होंने विधायक पद के लिए नामांकन किया और जनता के भारी समर्थन से विधायक निर्वाचित हुईं। उनकी जीत इस बात का प्रमाण है कि जनता आज भी ईमानदार, मेहनती और ज़मीन से जुड़ी हुई नेतृत्व शैली को पसंद करती है।

रीती पाठक जी का मानना है कि राजनीति का असली उद्देश्य जनता की सेवा और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। वे अक्सर अपने क्षेत्र में घूम-घूम कर लोगों की समस्याएँ सुनती हैं और त्वरित समाधान का प्रयास करती हैं। यही वजह है कि वे महिलाओं, किसानों, युवाओं और बुजुर्गों के बीच एक लोकप्रिय चेहरा बन चुकी हैं।

उनकी प्राथमिकताओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे सबसे ऊपर हैं। उन्होंने कई गाँवों में स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना में सहयोग किया है। इसके अलावा स्वरोजगार और महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं।

रीती पाठक न केवल एक राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि एक सशक्त महिला के रूप में भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि इच्छा शक्ति मजबूत हो और सेवा की भावना हो, तो कोई भी व्यक्ति समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।

आज जब राजनीति में विश्वास की कमी की बातें होती हैं, ऐसे समय में रीती पाठक जैसी नेत्रियाँ आशा की किरण बनकर सामने आती हैं। उनका समर्पण, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति निष्ठा निश्चित ही आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती है।

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